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सोमवार, 5 मार्च 2018

श्री शिव राज सिंह जी चौहान ==== जन्म दिन ५ मार्च == डर्टी 2018

श्री शिव राज सिंह जी चौहान ==== जन्म दिन ५ मार्च == डर्टी   2018
मुख्यमंत्री  , मध्यप्रदेश 

  ===  वर्ष उत्तम  2018 
======= विजयते == चुनावी  जीत बनी रहे 

==== कुछ सीटों की कमी से ===
वर्ष में  अच्छी स्थिति बनी  रहे , २०१७ की तरह इस वर्ष विषम परिश्थितियों में कमी आये ,
=== गत वर्ष की भांति इस वर्ष , संकट व् राज्य में उपद्रव की स्थिति कम बने सो शांति  राज्य  में रहे \
 --- कर्मचरियों से सदैव , वर्ष भर , कुछ न कुछ , आंदोलन बनता चलता रहे इसे बढ़ने न , दे तुरंत ही लम्बा समाधान निकले तत्कालिक समाधान नहीं ----तुरंत ही उपद्रव शांत करने की कोशिश करें ]
=== कुछ साथियों की कुटिलता से दुख 

=== सप्त \ पकड़ मजबूत रहे 
==वर्ष में  में सप्ता  स्थिर योग हे ==== चुनावी जीत हो 
======== बिच में पद से हटने की ख़बरें भी चलती रहे === किन्तु निर्भीक होकर कार्य करते रहे \
 === ====================================
=== गुरु तुल्य और वृद्ध जनो का आशीर्वाद ले === उलझे नहीं इनसे === न ही पंडितों से उलझे ==
=== कभी वर्ष में २ बार विपरीत स्थिति बने --- धैर्य न खोये == 
=== वर्ष में सामर्थ्य भी बढ़ेगी === राज्य विस्तार भी 

=== शत्रु को पूरी तरह समझ ले पहले जो भी विरोधी पक्ष से हो या पक्ष का हो === उसकी सामर्थ्य को कमजोर न आंके == उसके बल को ज्यादा ही माने और फिर == अपना प्रयोजन हल करें \
=== विजयी होंगे === किन्तु  == धैर्य रखे === विचलित न हो == 
=== अधीनस्थों पर स्वभावगत प्रेम बनये रखे ==
== अधीनस्थों पर चीड़ चिड़ाहट से मन व्यथित न करें === 
===== केंद्र से सहयोग मिटा रहे ===
== अकस्मात ही == आपकी रक्षा होती रहे === इति श्री २०१८ फल कथन वर्ष पूर्णम 
----- भगवती रक्षा करें === आनंद शिव मेहता ==   ५ मार्च २०१८ == रात्रि ११=०५ बजे लिखा 

 जो पड़े उसका धन्यवाद === जय श्री राम == आपकी कीर्ति फैलती रहे ===

शनिवार, 23 सितंबर 2017


                विधान सभा चुनाव 2018 मध्यप्रदेश |                          23 septembar 2017 प्रति 

                              श्री शिवराज सिंह जी चौहान 


                        सप्तापक्ष विजयते , परिश्थिति विषम 
                        नेतृत्व       श्री शिवराज सिंह जी चौहान 
                                        ------------------------------5  मार्च 1959  आधार 
             विशेषता चुनाव == जन्म समय का शनि चुनाव समय सम अंश पर , जन्म समय गुरु चुनाव समय सम अंश पर रहेगा किन्तु चुनाव समय अस्त  रहने से कुछ निर्णय प्रभावित होंगे }
             चुनाव में बलि पक्ष - लाभदायी समय === यदि चुनाव की तारीख २4से 29  नवम्बर 2019   रहे तो 
             ---------------------------------------------------------------------
आपको  अत्यंत लाभदायी समय रहे , तमाम कठिनाइयों के बावजूद भी बहुत ही ज्यादा जन समर्थन आपको मिले |
----------श्रेष्ठ चुनाव वोटिंग दिन व्यापक जनसमर्थन हेतु 25  या 26  नवम्बर ही सर्वश्रेष्ठ हे  --------------

            शनि चुनाव को प्रभावित करने की स्थिति में रहेगा मगर इस समय के चुनावों में यह सप्ता पक्ष को अत्यंत ही प्रभावित करने वाला रहेगा , और यह शनि इस समय सप्ता को परिवर्तित नहीं करता हे , यह सप्ता पक्ष को सहायक हे \ 
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          आपका बलवान समय 10  अक्टुम्बर 2018 तक का रहेगा 
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          10  अक्टुम्बर पश्चात कुछ परिश्थितियां विपरीत लगने लगेगी और मन का विश्वाश कमजोर होगा इस समय धैर्य से  अपने कार्य को पूर्ण करे |
                नवम्बर माह में अचानक कुछ असमंजस की स्थिति में आप अपने आप को घिरा पाएंगे , लगने लगेगा की बहुत विपरीत हो रहा हे या होने को हे , धैर्य धीरज से कार्य संपन्न करें , समय ज्यादा  कठिन विपरीत मगर शत्रु मंडल आपको नुकसान ज्यादा नहीं दे सकेगा |
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              सर्वाधिक मत आपको नवयुवाओ और स्त्रीवर्ग से ही मिलेंगे  इन्हीं पर ज्यादा ध्यान केंद्रित हों 
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               पुनः सप्ता प्राप्ति योग प्रबल 
==============================
               विरोध पक्ष === किसान [ बुध यह अस्त होने से प्रभाव हिन् होंगे   ] ,
                                      ब्राह्मण ज्ञानी [ गुरु यह वर्ग ज्यादा प्रभावी नहीं होगा ], 
                                      व्यापारी , ऑफिसर [ सूर्य ]  वर्ग  रहेंगे किन्तु यह सभी केवल चुनाव समय ही विपरीत होंगे | यह तीनो ही शनि से बारहवे हे जो की आपकी नाम राशि हे | 
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              सर्वाधिक प्रभावित चुनावों को == व्यापारी  वर्ग और ऑफिसर वर्ग ही करेगा  विजयी हेतु इन्हे प्राथमिकता दी जाये 
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               आगामी जन्मदिन से वर्ष मार्च 2018  से मार्च 2019  तक का अनेको कठिनाइयों से भरा होगा वर्ष 2017  की तरह अनेको परेशानियों विवादों के बाद भी आपका हर विपरीत स्थिति से बचाव होता रहा हे वह समय आपका आगे नहीं रहेगा , अनुकूलता कम होगी , परिश्थिति विपरीत भी , अत्यंत धैर्य , धीरज के साथ कार्य संपन्न करें |  समय कठिनाई का के किन्तु पूर्ण विपरीत नहीं | 
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               मार्च  18  के बाद कभी कभी पद पर भी आंच आने के योग बनते हे  सावधानी बरते 
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               18  दिसंबर तक सप्ता मुकुट आपके सर पर हो यहां पर 
========================================== चुनाव निर्णय से 15  दिसम्बर तक पार्टी के वरिष्ठों के भी विपरीत होने के योग बनते आप वरिष्ठों से तालमेल बनाकर ही चले , |
               15  नवम्बर से 17  दिसंबर तक विपरीत योग बनने से पद परिवर्तन की चर्चा भी सुनाई देंगी और कुछ षड्यंत्र भी गुप्त होंगे ही  यही समय धैर्य का हे | 
              ==== सलाह आप हेतु महत्वपूर्ण यहीं होः की चुनाव 10  नवम्बर के पहले ही संपन्न हो जाये पूर्ण विजयी और सप्ता पर पुनः बने रहने हेतु 
======================
=======  अत्यंत त्रास का समय टेंशन का समय और कुछ न कर पाने का समय  17  दिसंबर से 15  जनवरी तक का हे , इसमें लगेगा की सभी कुछ विपरीत हे और कुछ ठीक नहीं हे |  इस माह में आप अपने आप को प्रभावी महसूस नहीं करेंगे , विपरीत सी शून्य स्थिति का समय हे , इस समय बाद आप पुनः अत्यंत प्रभावी और महत्वपूर्ण स्थिति में आ जायेंगे , धैर्य से निर्णय करें | 
============================= इस समय सप्ता और आपके अत्यंत प्रभाव हीन होने का समय हे , यहीं वह समय होगा जब आपका पद  बदल दिया जाये  इस समय बहुत ही सावधानी रखे | 
========== यह समय पदच्युति का समय होगा ==========
              सभी समय सदैव एक समान नहीं कहते हे फिर भी विपरीत परिस्थिति समय में धैर्य ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता हे \    
              आपके प्रभाव में कमी और आत्मविश्वाश में भी 2018  में कमी होने के योग हे , आपको इस वर्ष की तरह 2018  में कठोर निर्णय से बचना चाहिए |  
========= अति आवश्यक होगा ======== विरोध के स्वर प्रेम से निपटाएं जाये ===
              1 disambar se 16 janvari savdhani rakhe is samy pad janee  ke yog 
======== 2018  मार्च पश्चात से एक नव यात्रा का आरम्भ होगा जीवन में कुछ बदलाव परिवर्तन यह वर्ष कठिनाई की और इंगित कर रहा हे | 
======== 2017  की तरह अनुकूलता की कमी 2018 फरवरी से आरम्भ होगी  सावधानी पूर्वक निर्णय धीरज से लिए जाये --- इति शुभम 
         मां भगवती कल्याण मयी हो , आपका वैभव , ऐश्वर्य , श्री की वृद्धि हों | 
  ग्रह गणित और ग्रह भर्मण के प्रभाव से जो नजर आया और में अपनी अल्प बुद्धि से जो निष्कर्ष निकल सका वहीं वर्णित किया === भगवान श्री गणेश से प्रार्थना हे की जो भी अच्छा लिखा हे वहीं घटित हों और जो विपरीत लिखा हे वह नहीं हो आपके जीवन में अच्छा ही अच्छा हों | 

                                                                          आनंद शिव मेहता 
                                                                      इंदौर = 9926077010

 
            

रविवार, 17 अप्रैल 2016

Difference Between Altitude and Latitude

Difference Between Altitude and Latitude



Altitude and latitude are commonly used terms in the field of astronomy and geography. Both are parameters relating to the angular position of a location.

More about Latitude =09926077010 == shiv mehta , indore , sheyr bajar , commodity , nifty 


The angular distance on a plane perpendicular to the plane of the equator is known as the latitude. This is used as one of the two coordinates for a location on earth. In the physical sense, it gives the north-south position of the location considered. The line at which the latitude is constant runs parallel to the equator around the globe.

Taken together with longitude, latitude can be used to specifically locate a position on earth. The equator is considered as the zero latitude (i.e. 0° ). The North Pole has the latitude +90° and the South Pole has -90°. There are specially defined latitudes, such as Arctic circle and Tropic of Cancer in the northern hemisphere and Antarctic circle and Tropic of Capricorn in the southern hemisphere.

Apart from the common usage shown above, latitude is further divide by the properties and relative definitions.

Geodetic Latitude is the angle between the plane of the equator and the normal to the surface at a point. Since earth is not perfectly spherical, the normal does not always pass through the center of the earth.

Geocentric latitude is the angle between the equator and the radius of a point on the surface.

Astronomical Latitude is defined as the angle between the equatorial plane and the true vertical at a point on the surface: the true vertical is the direction of a plumb line; it is the direction of the gravity field at that point.

More about Altitude ===== shiv mehta , teji mndi , indore

Altitude can be defined in a broader sense as the vertical distance between a datum line and a point considered above that line. The datum line can be selected in many ways. Therefore, many altitude terms are in use. The basic forms of altitudes in common use are the indicated altitude and the absolute altitude. These are mostly used in aviation because the altitude refers to the height of a point in the atmosphere. If the point considered is on the ground, it is known as elevation.

Altitude is also one of the key coordinates of the horizontal coordinate system used in astronomy. It is a coordinate system that uses observer’s horizon as the fundamental plane. The angular distance to a point on the celestial sphere from the horizon is defined as the altitude of that point. But in this case, the system altitude is used for angular measurement, not for linear measurement.

What is the difference between Altitude and Latitude? 09926077010

• The latitude is a measure from the equator, giving how high a point is located on the globe above the equator.

• The term altitude can be used in several cases;

• The height to a point from a datum line. (Geography and aviation)

• The angular position above the horizon of an observer. (Astronomy)

• The latitude is an angular measurement, hence given is degrees; together with longitude it is used to give exact coordinates of the position of a location.

• The altitude (in aviation) is the height to a point in the atmosphere, therefore, measured in units of length, such as meters.

• The altitude used in astronomy is also an angular measurement from the horizon, therefore, measured in degrees.

रविवार, 3 जनवरी 2016

हाथ देखकर कुंडली बनाना , अज्ञात कुंडली बनाना , जिनकी जन्म तिथि न हो उनकी कुंडली बनाना

 हाथ देखकर   कुंडली बनाना , अज्ञात कुंडली बनाना , जिनकी जन्म तिथि न हो उनकी कुंडली बनाना 

कभी कभी किसी कारणवश जन्म तारीख और दिन माह वार आदि का पता नही होता है,कितनी ही कोशिशि की जावे लेकिन जन्म तारीख का पता नही चल पाता है,जातक को सिवाय भटकने के और कुछ नही प्राप्त होता है,किसी ज्योतिषी से अगर अपनी जन्म तारीख निकलवायी भी जावे तो वह क्या कहेगा,इसका भी पता नही होता है,इस कारण के निवारण के लिये आपको कहीं और जाने की जरूरत नही है,किसी भी दिन उजाले में बैठकर एक सूक्षम दर्शी सीसा लेकर बैठ जावें,और अपने दोनो हाथों बताये गये नियमों के अनुसार देखना चालू कर दें,साथ में एक पेन या पैंसिल और कागज भी रख लें,तो देखें कि किस प्रकार से अपना हाथ जन्म तारीख को बताता है।शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 
==== mujhe to thik lga -- koshish kare aap ===
अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें-- 09926077010 , shiv mehta 
हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है,अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत,फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत,तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है,शनि पर्वत,और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत,अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं,इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है,इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है,उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है,जो रेखायें खडी होती है,उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है,गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों,बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है,से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें,की गिनती करनी है,ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से,गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें,इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी।
अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम --- 09926077010 
अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:-
१-बैशाख-मेष राशि--- 09926077010
२.ज्येष्ठ-वृष राशि
३.आषाढ-मिथुन राशि
४.श्रावण-कर्क राशि
५.भाद्रपद-सिंह राशि
६.अश्विन-कन्या राशि
७.कार्तिक-तुला राशि
८.अगहन-वृश्चिक राशि
९.पौष-धनु राशि
१०.माघ-मकर राशि
११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि
१२.चैत्र-मीन राशि

इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है।
हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है--- 09926077010 
प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है।
पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना--- swami aannd shiv mehta - indore 
वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है,तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये,और जन्म दिन का माना जाता है,इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है।
जन्म तारीख की गणना--शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 
मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है,यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है,१५ की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है।
जन्म वार का पता करना--- shiv mehta - 09926077010
अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों,उनको ५१७ से जोडकर ५ से गुणा करने के बाद ७ का भाग दिया जाता है,और जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है। १ से रविवार २ से सोमवार तीन से मंगलवार और ४ से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिनते जाते है।
जन्म समय और लगन की गणना---शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर
सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर,गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है,उन्हे गिनकर उस संख्या में ८११ जोडकर १२४ से गुणा करने के बाद ६० से भाग दिया जाता है,भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है,योगफ़ल अगर २४ से अधिक का है,तो २४ से फ़िर भाग दिया जाता है।
इस तरह से कोई भी अपने जन्म समय को जान सकता है।शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 

रविवार, 22 नवंबर 2015

== ममता बनर्जी -mamta banrjee, chunav 2016 - बंगाल चुनाव 2016 --মমতা জি বান্র্জী , চুনাভ ২০১৬ == অপ্রেল

== ममता बनर्जी -mamta banrjee,  chunav 2016 - बंगाल चुनाव 2016 --মমতা জি বান্র্জী , চুনাভ ২০১৬ == অপ্রেল
--- मुख्यमंत्री पद पुनः प्राप्ति योग उत्तम --

 जी बनर्जी का जन्म कृतिका  नक्षत्र 5  जनवरी 1955  कलकत्ता 
=== कृतिका नक्षत्र में जन्म होने से आप अपनी सहूलियत अनुसार ही सहयोगी पार्टी चुनती हे व् छोड़ती हे और यह इस मामले में अत्यंत ही भाग्यशाली हे \ 
=== जनवरी आरम्भ से  ममताकुछ आपके अधिकारों व् कोष में कमी की दुविधा होने बाद भी आपको सफलता की बहुत ही ज्यादा सम्भावना लगती हे \\
== इ=स समय मुंथा लग्न और चलित में अष्टम में मंगल युक्त होने से आपके सहयोगियों के दूर होने साथ छोड़कर चले जास्थितिने विवाद होने की  बनेगी कुछ लोग आपकी पार्टी को छोड़ देंगे \\ 
=== आखेट सहम ठीक होने में चुनावों में प्रभावी रहने से लाभ हे व् विजयी होने के ज्यादा चंश बनते हे \
=== इस समय आपको अनेको  नए लोगो का साथ मिलेगा और एक नए धुर्वीकरण का सूत्रपात होगा जिसके कारण आपको राज्य के चुनावो में लाभ की सम्भावना हे \\
=== वर्तमान समय शनि के आपके जन्म से साधक तर में रहने से आपको चुनावो में दलित और पिछड़े वर्ग का बहुत सहयोग मिलेगा जिसका आप प्रतिनिधित्व करती हे और इस समय आपको शनि लाभकारी हे \
=== सर्वाधिक  सफलता के व् पद पुनः प्राप्ति के आपको ज्यादा चंश बनते हे -- किन्तु इस समय समय आपका प्रतिद्वंद्वी घोसित नहीं होनेपदस्थ हो --
===वेव सूत्र से जानकारी से लिखा == आज दिनांक 22 -11 -2015  रविवार को दोपहर 11 .20  बजे - 
आनंद शिव मेहता == शिव मेहता == इंदौर = 09926077010 == स शुल्क सलाह राजनैतिक 
=== सावधानी -- इस समय आपको समय की अनुकूलता प्राप्त हे फिर भी विजयी होने की कामना चने की इच्छा रखने व् वजयी होने की कामना हेतु आपको सहयोगियों  को बदन होगा व्  अपने सहयोगियों को दूर जाने से रोकना होगा व् धार्मिक अनुष्ठानो का सहारा लेना चाहिए -- इस समय सहयोगियों से विवाद की स्थिति बनने से आपको दूर रहकर शांती से चुनाव पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए == 
= नोट == ज्योतिष योग  अनुसारलिखा  न यह किसी के पक्ष में हे और न किसी के विरुद्ध हे तह ततष्ठ होता हे से दोनों का तुलनात्मक अध्ययन नहीं होने से आपके पुनः मुक्यमंत्री का आज लिखना ठीक नहीं जानते हे -- फिर भी आपके पुनः मुख्यमंत्री बनने के ज्यादा अवसर हे और इस बात में कोई दुविधा नहीं की आप पुनः वह   \\ 

सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा ,navdurga ke nav rup

इन 9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा ,navdurga ke nav rup , navratree ,

मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीमें उपलब्ध वे औषधि‍यां, जिन्हें मां दुर्गा के विभि‍न्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि‍ स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा गया है।
ऐसा माना जाता है कि यह औषधि‍यां समस्त प्राणि‍यों के रोगों को हरने वाली और और उनसे बचा रखने के लिए एक कवच का कार्य करती हैं, इसलिए इसे दुर्गाकवच कहा गया। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जीवन जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -
1 प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ - नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली
औषधि‍ हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।
इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।
पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान

हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता) शिवा - कल्याण करने वाली।
2 द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी - ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। 
यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए।
तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेती चतुर्थकम
3 तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर - नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।
यह औषधि‍ मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।
4 चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा - नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डा देवी की आराधना करना चाहिए।
पंचम स्कन्दमा‍तेति षष्ठमं कात्यायनीति च
5 पंचम स्कंदमाता यानि अलसी - नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा
दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।
6 षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया - नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है। इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।
सप्तमं कालरात्रीति महागौ‍रीति चाष्टम
7 सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन - दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है।इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली
वं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।
8 अष्टम महागौरी यानि तुलसी - नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।

तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौ
री शूलघ्‍नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता
9 नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी - नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए।
इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए। 09926077010