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सोमवार, 5 मार्च 2018

श्री शिव राज सिंह जी चौहान ==== जन्म दिन ५ मार्च == डर्टी 2018

श्री शिव राज सिंह जी चौहान ==== जन्म दिन ५ मार्च == डर्टी   2018
मुख्यमंत्री  , मध्यप्रदेश 

  ===  वर्ष उत्तम  2018 
======= विजयते == चुनावी  जीत बनी रहे 

==== कुछ सीटों की कमी से ===
वर्ष में  अच्छी स्थिति बनी  रहे , २०१७ की तरह इस वर्ष विषम परिश्थितियों में कमी आये ,
=== गत वर्ष की भांति इस वर्ष , संकट व् राज्य में उपद्रव की स्थिति कम बने सो शांति  राज्य  में रहे \
 --- कर्मचरियों से सदैव , वर्ष भर , कुछ न कुछ , आंदोलन बनता चलता रहे इसे बढ़ने न , दे तुरंत ही लम्बा समाधान निकले तत्कालिक समाधान नहीं ----तुरंत ही उपद्रव शांत करने की कोशिश करें ]
=== कुछ साथियों की कुटिलता से दुख 

=== सप्त \ पकड़ मजबूत रहे 
==वर्ष में  में सप्ता  स्थिर योग हे ==== चुनावी जीत हो 
======== बिच में पद से हटने की ख़बरें भी चलती रहे === किन्तु निर्भीक होकर कार्य करते रहे \
 === ====================================
=== गुरु तुल्य और वृद्ध जनो का आशीर्वाद ले === उलझे नहीं इनसे === न ही पंडितों से उलझे ==
=== कभी वर्ष में २ बार विपरीत स्थिति बने --- धैर्य न खोये == 
=== वर्ष में सामर्थ्य भी बढ़ेगी === राज्य विस्तार भी 

=== शत्रु को पूरी तरह समझ ले पहले जो भी विरोधी पक्ष से हो या पक्ष का हो === उसकी सामर्थ्य को कमजोर न आंके == उसके बल को ज्यादा ही माने और फिर == अपना प्रयोजन हल करें \
=== विजयी होंगे === किन्तु  == धैर्य रखे === विचलित न हो == 
=== अधीनस्थों पर स्वभावगत प्रेम बनये रखे ==
== अधीनस्थों पर चीड़ चिड़ाहट से मन व्यथित न करें === 
===== केंद्र से सहयोग मिटा रहे ===
== अकस्मात ही == आपकी रक्षा होती रहे === इति श्री २०१८ फल कथन वर्ष पूर्णम 
----- भगवती रक्षा करें === आनंद शिव मेहता ==   ५ मार्च २०१८ == रात्रि ११=०५ बजे लिखा 

 जो पड़े उसका धन्यवाद === जय श्री राम == आपकी कीर्ति फैलती रहे ===

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

नौकरी लगने केपाय , नौकरी साक्षात्कार पर जाने से पहले, before moving to Job Interview.,इंटरव्यू में पास होने के तरीके

====नौकरी लगने केपाय ==  नौकरी साक्षात्कार पर जाने से पहले।===इंटरव्यू में पास होने के तरीके ===== before moving to Job Interview....पास होने के लिए यह उपाय (अचूक)   ===

== शिव मेहता , जानेमाने ज्योतिष आचार्य विचारक  के अनुसार, हर व्यक्ति की अपने जीवन में कामना होती है की उसे अच्छी नौकरी मिले या उसका रोज़गार उसका कारोबार श्रेष्ठ हो । कभी-कभी पर्याप्त योग्यता होने, सब कुछ ठीक होने , लिखित परीक्षा, इंटरव्यू अच्छा होने के बाद भी कुछ ऐसी अड़चने आ जाती हैं, जिससे नौकरी मिलते-मिलते रह जाती है। या अच्छी नौकरी नहीं मिलती है । ये सब कुण्डली के ग्रहों के कारण होता है, जिससे आपके बनते काम बनते बनते बिगड़ जाते है, आपकी नौकरी, रोज़गार में कोई ना कोई दिक्कते आ जाती है। लेकिन कुछ उपायों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ चुपचाप करके हम अपनी नौकरी की राह में आने वाली सभी अड़चनों को निश्चय ही दूर कर सकते है।09926077010
=== उपाय ही महत्व के हे == हर व्यक्ति एक सुपर पावर चाहता हे == आप पीछे क्यों हे जी \\
👉 मनोवैज्ञानिक उपाय (अचूक)===
साक्षात्कार वाले दिन, जाने के पूर्व 21 गहरी साँस को को लेकर छोड़े एवं प्रतियेक अन्तराल पर 21 बार मन में दोहराये कि " मैं स्थिर विचारो वाला आत्मबली इन्सान हूँ। मुझे इस नौकरी की आवश्यकता नहीं है।"
सीढ़ी चदकर जाते समय आपके जन्मांक नंबर की stair पर रुक कर 9 गहरी साँस ले एवं पिछली नौकरी या पढाई के दौरान आपकी उपलब्धियों का ध्यान कर लें। 
पार्किंग स्थल पर आपके जन्मांक नंबर की नंबरप्लेट लगे वाहन को देखकर 9 गहरी साँस ले एवं पिछली नौकरी या पढाई के दौरान आपकी उपलब्धियों का ध्यान कर लें। 09926077010  
साक्षात्कार स्थल पहुँच कर, उस आफिस के किसी कर्मचारी से निवेदन कर जल मांग कर घूंट घूंट कर पीले।
साक्षात्कार के दौरान अपने दाये पैर को बाएँ की अपेक्षा कुछ इंच आगे जरुर रखें। 09926077010  
पूरी बातचीत के दौरान 2 या 3 बार दोनों हथेलियों को इसप्रकार body language दे जिससे सामने वाला आपकी दोनों खुली हथेलियों को स्पष्ट तौर पर देख सके।
👉 वैदिक उपाय एवं टोटके===== 09926077010  
अपनी अच्छी नौकरी के लिए प्रत्येक सोमवार को शिव जी के मंदिर जाकर शिवलिंग पर मीठा कच्चा दूध चढ़ाते हुए अखंडित अक्षत ( साबुत चावल , जो टूटे हुए ना हो ) अर्पित करके भगवान भोले नाथ से अपने मन की बात करें । इससे नौकरी में आने वाली समस्त अड़चने दूर हो जाती है ।
माह की किसी भी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो उस पर 7 या 11 दूर्वा अर्पित करें । फिर भगवान के आगे लौंग तथा सुपारी रखकर पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करें। तत्पश्चात जब भी किसी नौकरी के लिए या महत्वपूर्ण काम पर जाना हो तो इस लौंग को तथा सुपारी को साथ लेकर जाएं। आपको अपने कार्यों में सफलता मिलेगी । 09926077010  
जिन व्यक्तियों को बेहतर व्यापार, नौकरी की चाह है वह अपने घर में बजरंग बली का फोटो जिसमें उनका उड़ता हुआ चित्र हो लगाकर उसकी पूजा करें। 09926077010  
यदि आप लाख प्रयत्न करने के बाद भी बेरोजगार हैं या आपको अपने कार्यों में ज़रा सी भी सफलता नहीं मिल रही है तो आप बिना दाग वाला पीला नींबू लेकर उसके चार बराबर के टुकड़े कर लें। फिर संध्या के समय किसी सुनसान चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में उन्हे फेंक दें और बिना पीछे मुड़े देखे घर वापस आ जायें। या उपाय शुक्ल पक्ष के किसी भी दिन से शुरू करते हुए सात दिन लगातार करें। इससे शीघ्र ही कार्य बनने लगेंगे, नौकरी, कारोबार में सफलता मिलेगी। यह प्रयोग अमावस्या विशेषकर शनि अमावस्या के दिन विशेष रूप से प्रभावी होता है ।
जब भी आप किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाये , तो एक नींबू के ऊपर चारो दिशाओं में चार लौंग गाड़ कर ( अगर लौंग ना गढ़ पाये तो नींबू में आलपिन से छेद करके लौंग गाड़ दें ) ‘ॐ श्री हनुमते नम:’ मंत्र का 108 बार जप करके उस नींबू को भी अपने साथ लेकर जाएं। आपको नौकरी मिलने की सम्भावना प्रबल होगी ।
जब भी आप किसी इंटरव्यू देने जाये तो गुड चना या आटे के पेड़े में गुड रखकर जाये और रास्ते में कोई भी गाय नजर आए तो उसे अपने हाथ से यह खिला दें , आपको शुभ समाचार मिलेंगे । 09926077010  
जब भी आप किसी इंटरव्यू देने जाये तो गुड चना या आटे के पेड़े में गुड रखकर जाये और रास्ते में कोई भी गाय नजर आए तो उसे अपने हाथ से यह खिला दें , आपको शुभ समाचार मिलेंगे । 09926077010  
यदि आपका कोई जरुरी काम होते होते रह जाता है तो आप शुक्ल पक्ष में हल्दी की 7 साबुत गांठें, 7 गुड़ की डलियां, एक रुपये का सिक्का किसी पीले कपड़े में बांध कर रेलवे लाइन के पार फेंक दें। फेंकते समय कहें काम दे, इससे काम के आपके पक्ष में होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। 09926077010  
किसी भी मंगलवार से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक नित्य प्रात: नंगे पैर हनुमानजी के मंदिर में जाकर उन्हें लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से शीघ्र ही रोजगार मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है।
इंटरव्यू देने जाने से पहले सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करें फिर भगवान के सामने 11 अगरबत्ती जलाकर अपनी मनोकामना कहें। इंटरव्यू देने के लिए निकलते समय एक चम्मच दही और चीनी खाकर सबसे पहले दायां पैर घर से बाहर निकालें ।
मान्यता है कि यदि सुबह-सुबह पंक्षियों को दाना खिलाया जाय तो नौकरी , रोज़गार सम्बन्धी कामनाएं पूर्ण होती है । यदि रोज सुबह आप पंक्षियों को सात प्रकार के अनाजों को मिलाकर दाना खिलाते हैं तो निश्चय ही आपकी मनचाही नौकरी के योग प्रबल होंगे । 09926077010  
प्रत्येक शनिवार को शनि देव की पूजा करते हुए “ॐ शं शनैश्चराय नम:” मंत्र का 108 बार जप करें, इससे कुण्डली में किसी भी ग्रह द्वारा सभी तरह की बाधाएं शान्त होती है। नौकरी , रोज़गार मिलने के अवसर बढ़ जाते है ।
जीवन में सुख की चाह रखने वाले प्रत्येक मनुष्य को श्रीकृष्ण का मूलमंत्र ‘कृं कृष्णाय नमः’ का जाप नित्य प्रातः काल स्नानादि के पश्चात एक सौ आठ बार करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन से सभी बाधाएं एवं कष्ट दूर रहते हैं। 09926077010  
पीतल के लोटे में गंगा जल भरकर उसमें ‘चांदी’ व ‘सोने’ की वस्तु डालकर उसे अपने घर के ईशान कोण पर सिर से ऊपर के किसी साफ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर रखकर ‘ऊँ गंगाधराय नम:’ मंत्र का 11 बार जाप करें। इससे नज़र ऊपरी बाधायें दूर होती है, नौकरी के अवसर बढ़ते है, व्यापार में श्रेष्ठ लाभ होता है और घर में सुख समृद्धि का भी आगमन होता है।
== और भी अनेको सामान्य उपाय हे -- यह उपायों का संकलन हे जो चाहे अपनाये == किन्तु इससे १०० टका हो ही जायेगा बगैर योग्यता के यह निराधार ही समझना == राम राम जी 09926077010 

रविवार, 17 जनवरी 2016

Career & Karakamsh Kundali ,कॅरियर और कारकांश कुंडली , कॅरियर कोण सा कैसे बनाये \

Career & Karakamsh Kundali कॅरियर और कारकांश कुंडली , कॅरियर कोण सा कैसे बनाये \


keriyar chuno or aage badon 

09926077010 ya hamse jano 


\आज युवाओं के बीच सबसे अधिक चिंता का विषय आजीविका है.चिंता के इस विषय का समाधान ज्योतिष विधि से किया जाए तो मुश्किल काफी हद तक आसान हो सकती है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार हमारी कुण्डली में सब कुछ लिखा है बस उसे गहरी से जानने की आवश्यकता है.आइये जानें क्या 

कहती है कुण्डली कैरियर के बारे में.

आजीविका और कैरियर के विषय में दशम भाव को देखा जाता है (Tenth Bhava is for Career).दशम भाव अगर खाली है तब दशमेश जिस ग्रह के नवांश में होता है उस ग्रह के अनुसार आजीविका का विचार किया जाता है.द्वितीय एवं एकादश भाव में ग्रह अगर मजबूत स्थिति में हो तो वह भी आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार व्यक्ति की कुण्डली में दशमांश शुभ स्थान पर मजबूत स्थिति में होता है (Strongly placed tenth lord) तो यह आजीविका के क्षेत्र में उत्तम संभावनाओं का दर्शाता है.दशमांश अगर षष्टम, अष्टम द्वादश भाव में हो अथवा कमज़ोर हो तो यह रोजी रोजगार के संदर्भ में कठिनाई पैदा करता है.\
जैमिनी पद्धति के अनुसार व्यक्ति के कारकांश कुण्डली में लग्न स्थान में सूर्य या शुक्र होता है तो व्यक्ति राजकीय पक्ष से सम्बन्धित कारोबार करता है अथवा सरकारी विभाग में नौकरी करता है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न स्थान में हो (Moon in Ascendant in Karakamsh Kundali) और शुक्र उसे देखता हो तो इस स्थिति में अध्यापन के कार्य में सफलता और कामयाबी मिलती है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न में होता है और बुध उसे देखता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर की बेहतर संभावनाओं को दर्शाता है.कारकांश में मंगल के लग्न स्थान पर होने से व्यक्ति अस्त्र, शस्त्र, रसायन एवं रक्षा विभाग से जुड़कर सफलता की ऊँचाईयों को छूता है.
कारकांश लग्न में जिस व्यक्ति के बुध होता (Mercury in Ascendant of Karakamsh Kundali) है वह कला अथवा व्यापार को अपनी आजीविका का माध्यम बनता है तो आसानी से सफलता की ओर बढ़ता है.कारकांश में लग्न स्थान पर अगर शनि या केतु है तो इसे सफल व्यापारी होने का संकेत समझना चाहिए.सूर्य और राहु के लग्न में होने पर व्यक्ति रसायनशास्त्री अथवा चिकित्सक हो सकता है.

ज्योतिष विधान के अनुसार कारकांश से तीसरे, छठे भाव में अगर पाप ग्रह स्थित हैं या उनकी दृष्टि है तो इस स्थिति में कृषि और कृषि सम्बन्धी कारोबार में आजीविका का संकेत मानना चाहिए.कारकांश कुण्डली में चौथे स्थान पर केतु (Ketu in fourth house of Karakamsh Kundali) व्यक्ति मशीनरी का काम में सफल होता है.राहु इस स्थान पर होने से लोहे से कारोबार में कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली में चन्द्रमा अगर लग्न स्थान से पंचम स्थान पर होता है और गुरू एवं शुक्र से दृष्ट या युत होता है तो यह लेखन एवं कला के क्षेत्र में उत्तमता दिलाता है.
कारकांश में लग्न से पंचम स्थान पर मंगल (Mars in fifth house of Karakamsh Kundali) होने से व्यक्ति को कोर्ट कचहरी से समबन्धित मामलों कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली के सप्तम भाव में स्थित होने से व्यक्ति शिल्पकला में महारत हासिल करता है और इसे अपनी आजीविका बनाता है तो कामयाब भी होता है.करकांश में लग्न से पंचम स्थान पर केतु व्यक्ति को गणित का ज्ञाता बनाता है.
docter banne ke yog 
”जैमिनी सूत्रम्“ के श्लोक नं. 87 के अनुसार यदि कारकांश लग्न में शुक्र या चंद्र हो और वहां स्थित चंद्र को बुध देखता हो तो जातक डाॅक्टर होता है। Û आचार्य मुकंद देवज्ञ के अनुसार यदि आत्मकारक ग्रह मंगल हो या मेष या वृश्चिक नवांश में हो तो जातक डाॅक्टर होता है। Û यदि आत्मकारक ग्रह मंगल का संबंध चंद्र या सूर्य से हो तो जातक सरकारी अस्पताल में डाॅक्टर होता है। विवेचन एवं विश्लेषण: इसमें हमने 36 कुंडलियों का अध्ययन किया। इस सर्वेक्षण में हमने पाया कि अधिकतर जातक की कुंडलियों में आत्मकारक ग्रह बुध है और बुध का दृष्टि-युति प्रभाव कुल मिलाकर 52 प्रतिशत सबसे अधिक पाया गया। बुध का जो कि बुद्धि, स्मरण शक्ति, तर्क का प्रतीक है जातक को चिकित्सक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। बुध के बाद सूर्य का आत्मकारक ग्रह के रूप में महत्वपूर्ण योगदान रहा, सूर्य जो कि औषधि और स्वास्थ्य का कारक है। चिकित्सक बनने के लिए इसका बली होना जरूरी है। इसके बाद मंगल का जो कि शक्ति, ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है। प्रभाव सबसे अधिक पाया गया। अगर आत्मकारक ग्रह मंगल हो या मंगल के नवांश में हो या नवांश कुंडली में मंगल से दृष्ट हो या युक्त हो तो डाॅक्टर होता है। मंगल क्योंकि रक्त का कारक है। तेज धार वाले औजारों का कारक है। चिकित्सा क्षेत्र में इनका योगदान होता है। इसलिए बली मंगल का जातक को चिकित्सक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। राहु और केतु को यद्यपि आत्मकारक नहीं माना फिर भी इसका युति व दृष्टि प्रभाव सबसे अधिक रहा। राहु केतु का सम्मिलित प्रभाव 61 प्रतिशत आश्चर्यजनक है। राहु एंटीबायटिक औषधियों का प्रतीक है। जीवाणुनाशक औषधियों द्वारा रोग का उपचार करने में राहु व केतु का बली होना आवश्यक है। ग्रह युति प्रभाव: हमारे सर्वेक्षण में डाॅक्टरों की कुंडलियों में बुध केतु और मंगल का युति प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। दृष्टि प्रभाव: आत्मकारक ग्रह पर सबसे अधिक राहु का दृष्टि प्रभाव था, राहु का 25 प्रतिशत दृष्टि प्रभाव 

ज्योतिष :कुंडली से जाने:नौकरी के योग :किसे नौकरी मिलगी :नौकरी मे बाधाओं और उपाय :Astrology :Job yog: Who will get Jobs: obstacles and upay :

ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं।
कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं। कुंडली से जाने:नौकरी के योग :   किसे  नौकरी मिलगी :नौकरी मे बाधाओं और  उपाय :
रोजगार: 10 वीं हाउस, 2 हाउस और सूर्य
दशम भाव:कारक ---
पेशे, प्रसिद्धि, बिजली, स्थिति, अधिकार, सम्मान, सफलता, स्थिति, घुटनों, चरित्र, कर्म, जीवन, पिता, वरिष्ठ अधिकारियों, व्यापार में स्वयं और वरिष्ठ अधिकारियों, सफलता के बीच संबंध, पदोन्नति, सरकार से मान्यता राज्य, व्यापार, नौकरी, प्रशासनिक स्तर, मान-सम्मान, सफलता, सार्वजनिक जीवन, घुटने, संसद, विदेश व्यापार, आयात-निर्यात, विद्रोह
 दूसरा हाउस:कारक ---shiv mehta 09926077010 
धन, परिवार, भाषण, दाहिनी आंख, नाखून, जीभ, नाक, दांत, महत्वाकांक्षा, भोजन, कल्पना, धोखाधड़ी आभूषण,  कुटुंब, वाणी विचार, धन की बचत, सौभाग्य, लाभ-हानि, आभूषण, दृष्टि, दाहिनी आँख, स्मरण शक्ति, नाक, ठुड्डी, दाँत,  कला, सुख, गला, कान,
सूर्य :आत्मा, स्वास्थ्य, पिता, शक्ति, रॉयल्टी, सत्ता, शोहरत, नाम, साहस, विरासत, चिकित्सा,  प्रतिष्ठा, ताकत, , ज्ञान इच्छाशक्ति, ऊर्जा,सौभाग्य ,

 कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय  नियम: प्रथम, दूसरा भाव, छठे भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध  या इसके स्वामी से होगा तो  नौकरी के योग बनते  है ।
डी 9 ,डी १० चार्ट मे भी दिखना है। 
लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में 
नवमेश की दशा या अंतर्दशा में 
षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में
प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या anter dsha me 
दशमेश की दशा या अंतर्दशा में
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में  
नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।swami aannd shiv mehta = 09926077010 
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।

छठा भाव :छठा भाव नौकरी का एवं सेवा का है।
छठे भाव का कारक भाव शनि है।
 दशम भाव या दशमेश का संबंध छठे भाव से हो तो जातक नौकरी  करता है। 

राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :
जीवन की कोई भी शुभ या अशुभ घटना राहु और केतु की दशा या अंतर्दशा में हो सकती है।  
 गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से नौकरी मिलने के समय केंद्र या त्रिकोण में ।गोचर : शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों, तो नौकरी मिल सकती है,
गोचर  : नौकरी मिलने के समय शनि या गुरु का या दोनों का दशम भाव और दशमेश दोनों से या किसी एक से संबंध होता है।सरकारी नौकरी:यह जान लें कि दशम भाव बली हो तो नौकरी  .
 नौकरी के कारक ग्रहों का संबंध सूर्य व चन्द्र से हो तो जातक सरकारी नौकरी पाता है।
सूर्य. चंद्रमा व बृहस्पति 
सरकारी नौकरी मै उच्च पदाधिकारी बनाता है।
द्वितीय, षष्ठ एवं दशम्‌ भाव को अर्थ-त्रिकोण सूर्य की प्रधानता होने पर  सरकारी
 नौकरी करता है।
 केंद्र में गुरु स्थित होने पर 
सरकारी नौकरी मे  उच्च पदाधिकारी का पद प्राप्त होता है।
नौकरी  के अन्य योग :
शनि कुण्डली में बली हो  तो व्यक्ति नौकरी karta he \ 
नौकरी  के अन्य योग :
शनि कुण्डली में बली हो  तो व्यक्ति नौकरी करता है.
मंगल 
कुण्डली में बली हो तो पुलिस, खुफिया विभाग अथवा सेना में उच्च पद होने की संभावना होती है।
गुरु 
कुण्डली में बली हो तो  जातक को अच्छा वकील, जज, धार्मिक प्रवक्ता , ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद बनाता है।
बुध 
कुण्डली में बली हो तो  व्यापारी, लेखक, एकाउन्टेंट, लेखन एवं प्रकाशन, में  ।
शुक्र 
कुण्डली में बली हो तो  फिल्मी कलाकार,  गायक, सौंदर्य संबंधी ।
राहु से आयात व्यापार एवं केतु से निर्यात व्यापार ।  

 कामयाबी योग :
shiv mehta 09926077010 
कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है।  
फलादेश कैसे करते  है ----
 - जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो - शुभ फलदायक होगा।
- इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।
- जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।
-त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं।
- क्रूर भावों (3, 6, 11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।
- दुष्ट स्थानों (6, 8, 12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं।
- शुभ ग्रह केन्द्र (1, 4, 7, 10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।
-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं।
- सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते
shiv mehta 00026077010 
सूर्य और कॅरियर:  दसवां भाव सूर्य काघर माना गया है। दसवें घर से  प्रोफेशन, कॅरियर, कार्यस्थल, कार्य सफलता, प्रगति देखी जाती है। दसवें भाव में कोई अनिष्टकारी घर बैठा हो, सूर्य नीच एवं किसी ग्रह से पीड़ित हो,  सूर्य को ग्रहण लगा हो तो व्यक्ति के कॅरियर में समस्याएं आती हैं।  
नौकरी मिलने में बाधा आ रही हो और पदोन्नति में समस्याएं आ रही हो ,उन्हें सूर्य साधना से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।
 सूर्य के उपाय 09926077010
आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे 3 बार सूर्य के सामने
 ॐ घृणी सूर्याय नमः  का कम से कम 108 बार जप कर ले
 गायत्री का जप कर ले
 घर की पूर्व दिशा से रौशनी  आयेगी तो अच्छा रहेगा ।
घर में तुलसी का पौधा जरूर लगा दे
पिता की सेवा
शराब और मांसाहार न खिलाये
शिवजी ,पीपल के उपाय।

 कॅरियर में सफलता के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत का प्रतिदिन पाठ करें।
लाल वस्त्र, लाल चन्दन, तांबे का बर्तन, केसर, गुड़, गेहूं का दान रविवार को करना शुभ फल प्रदान करता है।
 रविवार काव्रत रखें, इस दिन नमक का प्रयोग न करें।
  घर से बहार निकलने से पहले थोड़ा सा गुड़ खाएं।
 माता पिता के पांव छुकर आशीर्वाद लें।

 नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिष को  दिखाइए ।09926077010 shiv mehta 

रविवार, 3 जनवरी 2016

हाथ देखकर कुंडली बनाना , अज्ञात कुंडली बनाना , जिनकी जन्म तिथि न हो उनकी कुंडली बनाना

 हाथ देखकर   कुंडली बनाना , अज्ञात कुंडली बनाना , जिनकी जन्म तिथि न हो उनकी कुंडली बनाना 

कभी कभी किसी कारणवश जन्म तारीख और दिन माह वार आदि का पता नही होता है,कितनी ही कोशिशि की जावे लेकिन जन्म तारीख का पता नही चल पाता है,जातक को सिवाय भटकने के और कुछ नही प्राप्त होता है,किसी ज्योतिषी से अगर अपनी जन्म तारीख निकलवायी भी जावे तो वह क्या कहेगा,इसका भी पता नही होता है,इस कारण के निवारण के लिये आपको कहीं और जाने की जरूरत नही है,किसी भी दिन उजाले में बैठकर एक सूक्षम दर्शी सीसा लेकर बैठ जावें,और अपने दोनो हाथों बताये गये नियमों के अनुसार देखना चालू कर दें,साथ में एक पेन या पैंसिल और कागज भी रख लें,तो देखें कि किस प्रकार से अपना हाथ जन्म तारीख को बताता है।शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 
==== mujhe to thik lga -- koshish kare aap ===
अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें-- 09926077010 , shiv mehta 
हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है,अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत,फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत,तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है,शनि पर्वत,और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत,अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं,इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है,इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है,उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है,जो रेखायें खडी होती है,उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है,गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों,बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है,से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें,की गिनती करनी है,ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से,गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें,इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी।
अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम --- 09926077010 
अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:-
१-बैशाख-मेष राशि--- 09926077010
२.ज्येष्ठ-वृष राशि
३.आषाढ-मिथुन राशि
४.श्रावण-कर्क राशि
५.भाद्रपद-सिंह राशि
६.अश्विन-कन्या राशि
७.कार्तिक-तुला राशि
८.अगहन-वृश्चिक राशि
९.पौष-धनु राशि
१०.माघ-मकर राशि
११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि
१२.चैत्र-मीन राशि

इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है।
हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है--- 09926077010 
प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है।
पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना--- swami aannd shiv mehta - indore 
वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है,तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये,और जन्म दिन का माना जाता है,इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है।
जन्म तारीख की गणना--शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 
मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है,यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है,१५ की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है।
जन्म वार का पता करना--- shiv mehta - 09926077010
अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों,उनको ५१७ से जोडकर ५ से गुणा करने के बाद ७ का भाग दिया जाता है,और जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है। १ से रविवार २ से सोमवार तीन से मंगलवार और ४ से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिनते जाते है।
जन्म समय और लगन की गणना---शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर
सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर,गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है,उन्हे गिनकर उस संख्या में ८११ जोडकर १२४ से गुणा करने के बाद ६० से भाग दिया जाता है,भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है,योगफ़ल अगर २४ से अधिक का है,तो २४ से फ़िर भाग दिया जाता है।
इस तरह से कोई भी अपने जन्म समय को जान सकता है।शिव मेहता -- 09926077010 === इंदौर 

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

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Compatible Elements , metal , mcx price,commodity  market, astrolozy 

Compatible Elements

  • Water and metal - Metal is an element that draws water. The water element attracts wealth and money. And whenever these two elements come together they create a great partnership. Both know how to make money and how to take advantage of opportunities.Metal enjoys taking care of water and nurturing her. Water on the other hand enjoys the sense of security that metal gives. Together, they can create a dynasty.
  • Earth and metal - Metal is created by the element earth. This combo makes for a very solid relationship. Metal is dependent on earth for grounding. A metal man will treat his mate as a true partner and value her opinions. Decision-making as a couple is methodical with all the pros and cons carefully weighed. Earth provides metal with the security of hearth and home.

Incompatible Elements

  • Fire and metal - These two elements will clash. In most cases, fire will assume a dominating role over metal, attempting to bend him to her will. Fire's mandate is to form and mold metal in a desire shape, but metal is too stubborn to allow himself to be manipulated for controlled. This combination is doomed from the start.
  • Wood and metal - Wood is cut by metal. While woo can be carved into a beautiful piece of furniture or sculpture, it can easily be destroyed by metal. In relationships, metal is critical of wood and wood quickly grows resentful.
  • Characteristicsof Metal People
  • A person born under the metal element will pursue his goals with a single-minded purpose, and has an unwavering confidence in himself and his ability to attain his goals.

    Overwhelming Desire to Succeed

    Metal people can overcome most obstacles and meet challenges head on, and these are very good traits. This type of dogged determination can help them in their quest for the prize. However, this same element can sometimes make them ruthless in their desire to accomplish their missions. This driving need to succeed is so ingrained in a metal person that there is a risk that this can become an Achilles' heel. When such an attribute is taken to the extreme, it no longer serves as a strength and transforms into a weakness.

    Stubborn

    One of the strongest traits that can be both positive and negative is the metal person's penchant for stubbornness. This can also make him inflexible and set in his ways. He might get into frequent arguments if he doesn't consciously try to be more accepting, especially of others.

    Self-Sufficient Loners

    You will find metal people being drawn to a lifestyle that tests their self-reliance. They find great satisfaction in overcoming insurmountable odds. For some it can become addictive as they place themselves in even more challenging circumstances just to prove to themselves that they can do it.

    Difficulty Recognizing Lost Causes

    A metal person is often unable to recognize a lost cause. It blinds him to the truth that the original goal wasn't right. Getting a metal person to first acknowledge such a situation is only a small part of the challenge. The rest is convincing him to let it go and move on.
    For a metal person it's almost impossible to admit defeat, much less surrender to a power greater than himself. The metal element is demanding and unforgiving. Perfection is an ideal, but gaining the objective is the utmost objective.

    Lucky with Money

    Metal people have an excellent instinct when it comes to money, and they tend to accumulate material wealth. They may even appear to have the "Midas touch." This is good since they also possess the taste for luxury living.
    You will often discover quite a collection of fine art in a metal person's home, especially when it comes to metal sculptures. This person's affinity for his element is usually reflected in the type of jewelry he wears. Precious metals are prized possessions, and he doesn't mind showing off his affluence.

    Careers

    Metal people find it difficult to conform to society's expectations. A nine-to-five job within a large company is not suitable for mostmetal personalities. A metal person needs to be independent and finds that he's better off working on his own. This element drives him to seek risk-taking careers, which might include:
    • Stunt work
    • Military career
    • Test pilot
    • Ocean-related jobs
    Any type of physically and mentally challenging job holds an allure for a metal person.

    Living with Metal Element Zodiac Sign

    The best advice for anyone in a relationship with a metal element zodiac sign is to give him plenty of freedom and space to exercise what he believes to be his God-given right to explore and test his mettle. If you attempt to cage a metal person in, the relationship will most likely fail.

सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा ,navdurga ke nav rup

इन 9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा ,navdurga ke nav rup , navratree ,

मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीमें उपलब्ध वे औषधि‍यां, जिन्हें मां दुर्गा के विभि‍न्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि‍ स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा गया है।
ऐसा माना जाता है कि यह औषधि‍यां समस्त प्राणि‍यों के रोगों को हरने वाली और और उनसे बचा रखने के लिए एक कवच का कार्य करती हैं, इसलिए इसे दुर्गाकवच कहा गया। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जीवन जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -
1 प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ - नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली
औषधि‍ हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।
इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।
पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान

हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता) शिवा - कल्याण करने वाली।
2 द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी - ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। 
यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए।
तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेती चतुर्थकम
3 तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर - नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।
यह औषधि‍ मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।
4 चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा - नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डा देवी की आराधना करना चाहिए।
पंचम स्कन्दमा‍तेति षष्ठमं कात्यायनीति च
5 पंचम स्कंदमाता यानि अलसी - नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा
दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।
6 षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया - नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है। इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।
सप्तमं कालरात्रीति महागौ‍रीति चाष्टम
7 सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन - दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है।इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली ए
वं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।
8 अष्टम महागौरी यानि तुलसी - नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।

तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौ
री शूलघ्‍नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता
9 नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी - नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए।
इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए। 09926077010

सोमवार, 13 जुलाई 2015

संतान दोष के ज्योतिषीय कारण, उपाय Child astrological defects cause Measure



Child astrological defects cause Measure 
 Married woman who wants her mother saying that she also calls her. Generally, most women are lucky who gets that luxury. Yet there are enough women who are deprived of the joys of being a mother. If husband and wife are both excellent in terms of health is not yet their babies here. It is possible that such an ominous astrological planet to bear deprived of this pleasure is keeping them. If the husband is away with the flaws in the health and astrology horoscopes of the woman in child-related interruptions may occur. According to astrology child causing obstruction in the genesis Yoga - the fifth sense and in the masters VII Sptmesh with the cruel planet so the woman could not become mothers. - V, VII sense of humor and woman suffering from Mercury enemy amount or if Mercury vile woman can not produce offspring. - The fifth sense, Rahu and Saturn at the sight of him then, VII expressions Tue and Ketu are eyeing, and thankfully so Ashtmesh reproductive problems arise. - VII in expressions vile sun or Saturn difficulties Sntanotptti are so vile. If a young child to achieve what the astrological horoscope of Upi- this planet are the sum total of these bad planet should take measures to avoid them: the first measure: child Gopal mantra chanting quarter million in auspicious start. Also Balmukund (Lddugopal g) to worship God. Find enjoyment of their butter-sugar. Ganapati with the remembrance by lighting the lamp of pure ghee and chant the following mantra. Mntr- h Clin Devaki, Vasudeva Jagtpte Govindo yarn in Dehi, Tnyn Krishna Twamham Srnngta: Clin h .. The second measure: his wife banana (banana) Balmukund under the tree to worship God. Sycamore tree to worship, jaggery, gram Find enjoyment. Thursday is obtained from 21 children. The third measure: 11 to dusk fast, each dog-child of God is derived from Rudraabhisek Shankar. The fourth measure: poor child, adopted girls, educating them, Likhaan, clothing, copy, book, food and drinks to children is derived by taking the cost of two years. Fifth measure: general, Biel, amla, neem, pipal and five planting leads to progeny. Some other effective measures --- - Harivansa mythology text. - Gopal sahasranAma the text. - V-VII, located in the brutal treatment of the planet. - Eat plenty of milk. - Creation of the god Lord Shiva daily ritual to worship. - Do not take a big disrespect to its imprecate. - Fully aware of religious conduct. - Help the poor and helpless people. Feed them food, donate. - Secret donations in a orphanage.09926077010

रविवार, 12 जुलाई 2015

लड़के वालों को ladki dikane ka का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय choice grils

 लड़के वालों को लड़की दिखाने का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय 
== इस माह अधिकतर  रिश्तों हेतु  लड़के व लड़की देखने दिखाने  व परिचय सम्मलेन का होता हे \\
= सोमवार को = 11  से 12  == शाम  6  से 7 

= मंगलवार को - 3  से 4  बजे के मध्य में 

== बुधवार को = 12  से 1  और शाम 7  से 8 
== गुरुवार को = सुबह 9  से 10  और सायंकाल 4  से 5  के मध्य में  
== शुक्रवार को = दोपहर 1  से 2   और रात्रि में 8  से 9  के मध्य में 
== शनिवार को == सुबह 10  बजे से 11  के मध्य में == यदि लड़के वालो को इस समय लड़की दिखाई जाती हे तो वह उन्हें अतिशीघ्र pasand आ जाती हे , इस तरह आपकी व्यर्थ की परेशानी बचती हे \\ जब भी लड़के वाले देखने आने वाले हो तब इस सरणी के समय में ही उन्हें दिखाने के लिया बुलवाये या इस तरह समय रखे की वह आपके यहाँ इस समय में ही पधारें \\ यह बहुत आजमाया हुवा समय हे \\

Guru गुरु पूर्णिमा gurupurnima gu utsav guru dikhsa gurumantr


Guru गुरु पूर्णिमा आने को हे 

अपने अपने गुरु के यहाँ अवश्य ही जाये 
आपका गुरु नही तो आपके पिता के गुरु

पिता ने भी नही बनाये तो दादा जी के गुरु 

स्वार्थ और लालच में आकर गुरु बदले नहीं
उच्च कुलीन धार्मिक वेदपाठी को ही गुरु बनाये
हिन् नीच स्वार्थी लालची लोभी निचे कुल का अधम पाखंडी प्रतिमा बेचने वाला
गुरु पद योग्य नही
सिख किसी की भी ली जा सकती हे
आप किसी को गुरु बनाये जिससे आपका मिलना अपनी समस्या का निदान पाना आवश्यकता के समय उपलब्ध हो उसे गुरु रूप में प्राथमिकता दे
धर्म के किसी बड़े व्यापारी को तामझाम देखकर लालच से गुरु न बनाये
इस समय यह भी अक कारोबार बन रहा हे
आप स्त्री हे तो अकेले न जाये
न ही किसी से अकेले गुप्त वार्तालाप करे
न ही अकेले सनिद्द्य की चेष्टा करे
गुरु की बात सार्वजनिक ही होती हे न की गुप्त
अकेले में अंग प्रत्यंग की स्वभावगत चेष्टा मन को विचलित कर आपको अधोगामी बनाती हे

-- swami aannd shiv mehta  09926077010 

शनिवार, 13 दिसंबर 2014

=== सिद्धी का भूत ===साधनाओ का संसार sadhna,seeddhee,bhut,pret,seeddh,

=== सिद्धी का भूत ===साधनाओ का संसार ==
          किसी व्यक्ति को साधनाओ को संपन्न करने का और प्रसिद्ध होने को शोक लगा = व पूजा पाठ करने लगा बहुत ज्यादा समय इसमें लगाने लगा \\
 == किसी ने उसको हनुमान जी की विधि बताई और यह भी बताया की इसमें संयम से रहते हे , उनकी पत्नी भी थी , कुछ ही दिनों में उन्हें एक संयमी प्रेत ने पकड़ लिया = उनकी भाषा में लिखे तो उन्हें सिद्धी हो गयी == अक्सर अनेको प्रेत-भुत अपनी सेवा के लिए लोगो को पकड़ लेते हे , और वह व्यक्ति उन्हीं की सेवा पूजा में लगा रहता हे \\ वह जो कहता हे वह होता हे उसको भविष्यवाणी का शोक लग जाता हे , उसकी वाणी में चमत्कार भी होते हे , आनेको रहस्यमय बातें भी वह बताता हे , और फिर होता हे इसका व्यापर आरम्भ = पहले वह साधक सेवा भावी ही होता हे फिर वह व्यापारी बनता जाता हे , उसके पास जुवारियो - सटोरियों की और आज के समय में वायदा बाजार वालों की लाइन लगती हे और बस == यह कुछ ही दिन चलता हे , फिर भविष्य बताने से उसका सत तेज नस्ट हो जाता हे \\ == इस तरह का व्यक्ति किसी प्रकार का कार्य या व्यवसाय नहीं करता हे = भगवन के नाम पर ही लोगो का दिया खाता हे , यदि व्यापर करें भी तो वह चलता नहीं हे , हाँ यदि नौकरी हो तो बात अलग हे ,\ == अब उनके संयम से पत्नी व्यथित उनका मन तो वह जाता नहीं और पत्नी की व्यथा - उसकी विरह वेदना और साहचर्य की चेस्टा बड़ी विलक्षण स्थिति == अब वह महाशय अलग कमरे में सोने लगे = कारण था की किसी दिन संयम जवाब दे गया और वह कुछ दिनों तक शक्ति विहीन से हो गए = फिर क्या नारी नरक का द्वार नजर आने लगी और क्या ........ पत्नी अन्यत्र ..... == अब यह महिलावों से भुत दूर रहते = उन्हें अपने पास भी नहीं आने देते = और बात किसी महिला से नहीं करते = किसी स्त्री को पैर भी नहीं छूने देते == इसका भी कारन था की स्त्री के पैर को हाथ लगाने के बाद उनकी काम चेस्टा तत्काल बाद जाती कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता और वह विचलित हो जाते और पत्नी से साहचर्य कर नहीं सकते सो हस्ताचार से ऊर्जा को नस्ट करने से ही शांति मिलती यह भी दुःख \\ == अब पत्नी के हाथ का बनाया खाना भी नहीं खाए स्वयं ही बनाये = परिवार भी और रिस्तेदार भी दुःखी मगर वह बड़े ही प्रशन्न की लोग तारीफ करते हे \\ == और इस तरह साधना ने उनका जीवन ही बदल दिया == स्वर्ग था यह या नरक समझ नहीं आता उन्हें किन्तु वह जानते थे की वह मोक्षगामी हे और परमात्मा के पास जायेंगे \\ == किन्तु वास्तव में यह एक बीमारी ही हे जो ठीक हो सकती हे , यह प्रेत बाधा ही हे , जो की किसी पूजा पति की आत्मा का प्रवेश हे \\ इस तरह यदि किसी बेवड़े की आत्मा लग जाये तो वह आदमी शराबी हो जाता हे , और यदि आत्मा किसी नीच आदमी की लग जाये तो वह नीच ही बन जता हे \\ किसी ज्योतिष की आत्मा लग जाये तो वह ज्योतिष हो जाता हे \\ किसी पंडित की आत्मा लग जाये तो आदमी पूजा पाठी बन जाता हे \\ जब भी कोई व्यक्ति अपनी आदत के विपरीत कार्य करने लग जाये तो समझो की किसी अन्य के असर में यह आ चूका हे \\ और यह कभी कभी नहीं होता हे यह उसकी महादशा के बदलने या अंतर दशा बदलने पर ही होता हे , यह यदि राहु के प्रभाव से हो तो वह शराबी = कबाबी सिद्ध , गुरु से हो तो अत्यंत धार्मिक पूजा पाठी , सूर्य से हो तो अत्यंत प्रभावशाली तेजस्वी गुरु , मंगल से हो तो हिंसक गुस्सेल सिद्ध , शुक्र से होतो धनात्मक संत या सिद्ध जिसका मन धन में लगा रहे , बुध से हो तो ज्ञानी विद्वान और ज्योतिष संत साधु या सिद्ध , शनि से हो तो नपुंसक ,त्यागी,तपस्वी,संत,सिद्ध प्रसिद्ध सन्यासी,वस्त्र विहीन संत बनता हे या इसी तरह की आत्मा उसको लगती हे \\ यह एक बीमारी ही हे जो ठीक हो जाती हे , \\ किन्तु आसानी से ठीक नहीं होती हे \\ इसका इलाज आधुनिक विज्ञानं के पास नहीं हे , और न ही कोई इलाज इनके पास हे , इस तरह की बीमारी को वह मानसिक रोग और डिप्रेशन कहते हे और उनके पास इसका एक ही इलाज हे , नींद की गोली या दवाई , इनका मन्ना हे की यह सो जायेगा तो ठीक हो जायेगा , किन्तु महीनो के इलाज से भी यह ठीक नहीं होते हे == इनको किसी जानकर , सिद्ध को दिखया जय तो यह कुछ ही समय में ठीक हो जाते हे == इस तरह की बीमारी अस्त केतु के समय या भीत अवस्था के समय प्रभावकारी होती हे \\ राम राम \\ === यहाँ तक पड़ने पर जो भी विचार आपको आये , वह अपनी स्वतंत्र पोस्ट बनाकर ही व्यक्त करे , कोई कॉमेंट , सलाह , विद्वत्ता या खुशी=दुःख व्यक्त नहीं करे , इससे लोग भटकते हे == यह भी संभव हे की आप हमसे ज्यादा ही जानते हे , और विद्वान भी आप हे ही \\ 09926077010 =

शनिवार, 15 नवंबर 2014

====श्री नारायण कवच===== === जीवन में उन्नति और सर्वबाधा के निवारण हेतु प्रयोग करें ==

====श्री नारायण कवच=====
=== जीवन में उन्नति और सर्वबाधा के निवारण हेतु प्रयोग करें ==

न्यासः- सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा भगवाननारायण को नमस्कार करके नीचे लिखे प्रकार सेन्यास करें।
अगं-न्यासः-
ॐ ॐ नमः — पादयोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी वअंगुठा — इन दोनों को मिलाकरदोनों पैरों का स्पर्श करें)।
ॐ नं नमः — जानुनोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी वअंगुठा — इन दोनों को मिलाकरदोनों घुटनों का स्पर्श करें )।
ॐ मों नमः — ऊर्वोः (दाहिने हाथकी तर्जनी अंगुठा — इन दोनों को मिलाकरदोनों पैरों की जाँघ का स्पर्श करें)।
ॐ नां नमः — उदरे ( दाहिने हाथकी तर्जनी तथा अंगुठा — इन दोनों को मिलाकर पेटका स्पर्श करे )
ॐ रां नमः — हृदि ( मध्यमा-अनामिका-तर्जनी सेहृदय का स्पर्श करें )
ॐ यं नमः – उरसि ( मध्यमा- अनामिका-तर्जनी सेछाती का स्पर्श करे )
ॐ णां नमः — मुखे ( तर्जनी – अँगुठे के संयोग से मुखका स्पर्श करे )
ॐ यं नमः — शिरसि ( तर्जनी -मध्यमा के संयोग से सिर का स्पर्श करे )
कर-न्यासः-
ॐ ॐ नमः — दक्षिणतर्जन्याम् ( दाहिने अँगुठे सेदाहिने तर्जनी के सिरे का स्पर्श करे )
ॐ नं नमः —-दक्षिणमध्यमायाम् ( दाहिने अँगुठे सेदाहिने हाथ की मध्यमा अँगुली का ऊपर वालापोर-स्पर्शकरे)
ॐ मों नमः —दक्षिणानामिकायाम् ( दहिने अँगुठे सेदाहिने हाथ की अनामिका का ऊपरवाला पोर-स्पर्श करे )
ॐ भं नमः —-दक्षिणकनिष्ठिकायाम् (दाहिने अँगुठे सेहाथ की कनिष्ठिका का ऊपर वाला पोर स्पर्शकरे )
ॐ गं नमः —-वामकनिष्ठिकायाम् ( बाँये अँगुठे सेबाँये हाथ की कनिष्ठिका का ऊपर वाला पोरस्पर्श करे )
ॐ वं नमः —-वामानिकायाम् ( बाँये अँगुठे से बाँयेहाँथ की अनामिका का ऊपरवाला पोर स्पर्श करे )
ॐ तें नमः —-वाममध्यमायाम् ( बाँये अँगुठे से बायेहाथ की मध्यमा का ऊपरवाला पोर स्पर्श करे )
ॐ वां नमः —वामतर्जन्याम् ( बाँये अँगुठे से बाँये हाथकी तर्जनी का ऊपरवाला पोर स्पर्श करे )
ॐ सुं नमः —-दक्षिणाङ्गुष्ठोर्ध्वपर्वणि ( दाहिनेहाथ की चारों अँगुलियों से दाहिने हाथ के अँगुठेका ऊपरवाला पोर छुए )
ॐ दें नमः —–दक्षिणाङ्गुष्ठाधः पर्वणि ( दाहिनेहाथ की चारों अँगुलियों से दाहिने हाथ के अँगुठेका नीचे वाला-पोर छुए )
ॐ वां नमः —–वामाङ्गुष्ठोर्ध्वपर्वणि ( बाँये हाथकी चारों अँगुलियों से बाँये अँगुठे के ऊपरवाला पोरछुए )
ॐ यं नमः ——वामाङ्गुष्ठाधः पर्वणि ( बाँये हाथकी चारों अँगुलियों से बाँये हाथ के अँगुठे का नीचेवाला पोर छुए )
विष्णुषडक्षरन्यासः-
ॐ ॐ नमः ————हृदये ( तर्जनी – मध्यमा एवंअनामिका से हृदय का स्पर्श करे )
ॐ विं नमः ————-मूर्ध्नि ( तर्जनी मध्यमा के संयोगसिर का स्पर्श करे )
ॐ षं नमः —————भ्रुर्वोर्मध्ये ( तर्जनी-मध्यमा सेदोनों भौंहों का स्पर्श करे )
ॐ णं नमः —————शिखायाम् ( अँगुठे सेशिखा का स्पर्श करे )
ॐ वें नमः —————नेत्रयोः ( तर्जनी -मध्यमा सेदोनों नेत्रों का स्पर्श करे )
ॐ नं नमः —————सर्वसन्धिषु ( तर्जनी – मध्यमा औरअनामिका से शरीर के सभी जोड़ों — जैसे – कंधा,
घुटना, कोहनी आदि का स्पर्श करे )
ॐ मः अस्त्राय फट् — प्राच्याम् (पूर्व की ओर-चुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् –आग्नेय्याम् ( अग्निकोण मेंचुटकी बजायें )
ॐ मः अस्त्राय फट् — दक्षिणस्याम् ( दक्षिण की ओरचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — नैऋत्ये (नैऋत्य कोण मेंचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — प्रतीच्याम्( पश्चिम की ओरचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — वायव्ये ( वायुकोण मेंचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — उदीच्याम्( उत्तर की ओरचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — ऐशान्याम् (ईशानकोण मेंचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — ऊर्ध्वायाम् ( ऊपर की ओरचुटकी बजाएँ )
ॐ मः अस्त्राय फट् — अधरायाम् (नीचे की ओरचुटकी बजाएँ )
श्री हरिः---अथ श्रीनारायणकवच
।।राजोवाच।।
यया गुप्तः सहस्त्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान्।
क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम्।।१
भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम्।
यथाssततायिनः शत्रून् येन गुप्तोsजयन्मृधे।।२

राजा परिक्षित ने पूछाः भगवन् ! देवराज इंद्र नेजिससे सुरक्षित होकर शत्रुओंकी चतुरङ्गिणी सेना को खेल-खेल में अनायासहीजीतकर त्रिलोकी की राज लक्ष्मी का उपभोगकिया, आप उस नारायण कवच को सुनाइये और यहभी बतलाईये कि उन्होंने उससे सुरक्षित होकररणभूमि में किस प्रकार आक्रमणकारी शत्रुओं पर विजयप्राप्त की ।।१-२
।।श्रीशुक उवाच।।
वृतः पुरोहितोस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायानुपृच्छते।
नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु।।३

श्रीशुकदेवजी ने कहाः परीक्षित् ! जब देवताओं नेविश्वरूप को पुरोहित बना लिया, तब देवराज इन्द्र केप्रश्न करने पर विश्वरूप ने नारायण कवच का उपदेशदिया तुम एकाग्रचित्त से उसका श्रवण करो ।।३
विश्वरूप उवाचधौताङ्घ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ्मुखः।
कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः।।४
नारायणमयं वर्म संनह्येद् भय आगते।
पादयोर्जानुनोरूर्वोरूदरे हृद्यथोरसि।।५
मुखे शिरस्यानुपूर्व्यादोंकारादीनि विन्यसेत्।
ॐ नमो नारायणायेति विपर्ययमथापि वा।।६

विश्वरूप ने कहा – देवराज इन्द्र ! भय का अवसरउपस्थित होने पर नारायण कवच धारण करके अपने शरीरकी रक्षा कर लेनी चाहिए उसकी विधि यह हैकि पहले हाँथ-पैर धोकर आचमन करे, फिर हाथ में कुशकी पवित्री धारण करके उत्तर मुख करके बैठ जाय इसकेबाद कवच धारण पर्यंत और कुछ न बोलने का निश्चय 
करके पवित्रता से “ॐ नमो नारायणाय” और “ॐ
नमो भगवते वासुदेवाय” इन मंत्रों के
द्वारा हृदयादि अङ्गन्यास
तथा अङ्गुष्ठादि करन्यास करे पहले “ॐनमो नारायणाय” इस अष्टाक्षर मन्त्र के ॐ आदि आठ
अक्षरों का क्रमशः पैरों, घुटनों, जाँघों, पेट, हृदय,वक्षःस्थल, मुख और सिर में न्यास करे अथवा पूर्वोक्तमन्त्र के यकार से लेकरॐ कार तक आठ अक्षरों का सिरसे आरम्भ कर उन्हीं आठ अङ्गों में विपरित क्रम से न्यासकरे ।।४-६
करन्यासं ततः कुर्याद् द्वादशाक्षरविद्यया।
प्रणवादियकारन्तमङ्गुल्यङ्गुष्ठपर्वसु।।७

तदनन्तर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस द्वादशाक्षर -मन्त्र के ॐ आदि बारह अक्षरों का दायीं तर्जनी सेबाँयीं तर्जनी तक दोनों हाँथ की आठ अँगुलियों औरदोनों अँगुठों की दो-दो गाठों में न्यास करे।।७
न्यसेद् हृदय ओङ्कारं विकारमनु मूर्धनि।
षकारं तु भ्रुवोर्मध्ये णकारं शिखया दिशेत्।।८
वेकारं नेत्रयोर्युञ्ज्यान्नकारं सर्वसन्धिषु।
मकारमस्त्रमुद्दिश्य मन्त्रमूर्तिर्भवेद् बुधः।।९
सविसर्गं फडन्तं तत् सर्वदिक्षु विनिर्दिशेत्।
ॐ विष्णवे नम इति ।।१०

फिर “ॐ विष्णवे नमः” इस मन्त्र के पहले के पहले अक्षर‘ॐ’ का हृदय में, ‘वि’ का ब्रह्मरन्ध्र , में ‘ष’का भौहों के बीच में, ‘ण’ का चोटी में, ‘वे’का दोनों नेत्रों और ‘न’ का शरीर की सब गाँठों मेंन्यास करे तदनन्तर ‘ॐ मः अस्त्राय फट्’ कहकर दिग्बन्धकरे इस प्रकर न्यास करने से इस विधि को जाननेवाला पुरूष मन्त्रमय हो जाता है ।।८-१०
आत्मानं परमं ध्यायेद ध्येयं षट्शक्तिभिर्युतम्।
विद्यातेजस्तपोमूर्तिमिमं मन्त्रमुदाहरेत ।।११

इसके बाद समग्र ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, ज्ञान औरवैराग्य से परिपूर्ण इष्टदेव भगवान् का ध्यान करे औरअपने को भी तद् रूप ही चिन्तन करे तत्पश्चात् विद्या,तेज, और तपः स्वरूप इस कवच का पाठ करे ।।११
ॐ हरिर्विदध्यान्ममसर्वरक्षां न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचापाशान्दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः ।।१२

भगवान् श्रीहरि गरूड़जी के पीठ पर अपने चरणकमल रखेहुए हैं, अणिमा आदि आठों सिद्धियाँ उनकी सेवा कररही हैं आठ हाँथों में शंख, चक्र, ढाल, तलवार, गदा,बाण, धनुष, और पाश (फंदा) धारण किए हुए हैं वेही ओंकार स्वरूप प्रभु सब प्रकार से सब ओर सेमेरी रक्षा करें।।१२
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्यपाशात्।
स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतुविश्वरूपः ।।१३

मत्स्यमूर्ति भगवान् जल के भीतर जलजंतुओं से और वरूण केपाश से मेरी रक्षा करें माया से ब्रह्मचारी रूप धारणकरने वाले वामन भगवान् स्थल पर और विश्वरूपश्री त्रिविक्रमभगवान् आकाश में मेरी रक्षा करें 13
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषुप्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः।
विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्चगर्भाः ।।१४
जिनके घोर अट्टहास करने पर सब दिशाएँ गूँज-उठी थीं और गर्भवती दैत्यपत्नियों के गर्भ गिर गये थे,वे दैत्ययुथपतियों के शत्रु भगवान् नृसिंह किले, जंगल,रणभूमि आदि विकट स्थानों में मेरी रक्षा करें ।।१४
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरोवराहः।
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोsव्याद्भरताग्रजोsस्मान् ।।१५

अपनी दाढ़ों पर पृथ्वी को उठा लेने वालेयज्ञमूर्ति वराह भगवान् मार्ग में, परशुरामजी पर्वतों के शिखरों और लक्ष्मणजी के सहित भरत केबड़े भाई भगावन् रामचंद्र प्रवास के समय मेरी रक्षा करें।।१५
मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्चहासात्।
दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद्गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात् ।।१६
भगवान् नारायण मारण – मोहन आदि भयंकरअभिचारों और सब प्रकार के प्रमादों सेमेरी रक्षा करें ऋषिश्रेष्ठ नर गर्व से, योगेश्वर भगवान्दत्तात्रेय योग के विघ्नों से औरत्रिगुणाधिपति भगवान् कपिल कर्मबन्धन सेमेरी रक्षा करें ।।१६
सनत्कुमारो वतुकामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्।
देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात्कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात् ।।१७
परमर्षि सनत्कुमार कामदेव से, हयग्रीव भगवान् मार्ग मेंचलते समय देवमूर्तियों को नमस्कार आदि न करने केअपराध से, देवर्षि नारद सेवापराधों से और भगवान्कच्छप सब प्रकार के नरकों से मेरी रक्षा करें ।।१७
धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद्भयादृषभो निर्जितात्मा।
यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात्क्रोधवशादहीन्द्रः ।।१८
भगवान् धन्वन्तरि कुपथ्य से, जितेन्द्र भगवान् ऋषभदेवसुख-दुःख आदि भयदायक द्वन्द्वों से, यज्ञ भगवान्लोकापवाद से, बलरामजी मनुष्यकृत कष्टों से औरश्रीशेषजी क्रोधवशनामक सर्पों के गणों सेमेरी रक्षा करें ।।१८
द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात्प्रमादात्।
कल्किः कले कालमलात् प्रपातुधर्मावनायोरूकृतावतारः ।।१९
भगवान् श्रीकृष्णद्वेपायन व्यासजी अज्ञान सेतथा बुद्धदेव पाखण्डियों से और प्रमाद सेमेरी रक्षा करें धर्म-रक्षा करने वाले महान अवतारधारण करने वाले भगवान् कल्कि पाप-बहुल कलिकाल केदोषों से मेरी रक्षा करें ।।१९
मां केशवो गदया प्रातरव्याद् गोविन्दआसङ्गवमात्तवेणुः।
नारायण प्राह्ण उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिनेविष्णुररीन्द्रपाणिः ।।२०
प्रातःकाल भगवान् केशव अपनी गदा लेकर, कुछ दिनचढ़ जाने पर भगवान् गोविन्द अपनी बांसुरी लेकर,दोपहर के पहले भगवान् नारायण अपनी तीक्ष्णशक्ति लेकर और दोपहर को भगवान् विष्णु चक्रराजसुदर्शन लेकर मेरी रक्षा करें ।।२०
देवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतुमाधवो माम्।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतुपद्मनाभः ।।२१
तीसरे पहर में भगवान् मधुसूदन अपना प्रचण्ड धनुष लेकरमेरी रक्षा करें सांयकाल मेंब्रह्मा आदि त्रिमूर्तिधारी माधव, सूर्यास्त के बादहृषिकेश, अर्धरात्रि के पूर्व तथा अर्ध रात्रि के समयअकेले भगवान् पद्मनाभ मेरी रक्षा करें ।।२१
श्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूषईशोऽसिधरो जनार्दनः।
दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान्कालमूर्तिः ।।२२
रात्रि के पिछले प्रहर में श्रीवत्सलाञ्छन श्रीहरि,उषाकाल में खड्गधारी भगवान् जनार्दन, सूर्योदय सेपूर्व श्रीदामोदर और सम्पूर्ण सन्ध्याओं मेंकालमूर्ति भगवान् विश्वेश्वर मेरी रक्षा करें ।।२२
चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद्भगवत्प्रयुक्तम्।
दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षंयथा वातसखो हुताशः ।।२३
सुदर्शन ! आपका आकार चक्र ( रथ के पहिये ) की तरह हैआपके किनारे का भाग प्रलयकालीन अग्नि के समानअत्यन्त तीव्रहै। आप भगवान् की प्रेरणा से सब ओर घूमतेरहते हैं जैसे आग वायु की सहायता से सूखे घास-फूसको जला डालती है, वैसे ही आपहमारी शत्रुसेना को शीघ्र से शीघ्र जला दीजिये,जला दीजिये ।।२३
गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गेनिष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि।
कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।।२४
कौमुद की गदा ! आपसे छूटनेवाली चिनगारियों का स्पर्श वज्र के समान असह्य हैआप भगवान् अजित की प्रिया हैं और मैं उनका सेवक हूँइसलिए आप कूष्माण्ड, विनायक, यक्ष, राक्षस, भूत औरप्रेतादि ग्रहों को अभी कुचल डालिये, कुचल डालिये=तथा मेरे शत्रुओं को चूर – चूर कर दिजिये ।।२४
त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।दरेन्द्र विद्रावय
कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन् ।।२५
शङ्खश्रेष्ठ ! आप भगवान् श्रीकृष्ण के फूँकने से भयंकर शब्दकरके मेरे शत्रुओं का दिल दहला दीजिये एवं यातुधान,प्रमथ, प्रेत, मातृका, पिशाच तथा ब्रह्मराक्षसआदि भयावने प्राणियों को यहाँ से तुरन्तभगा दीजिये ।।२५
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो ममछिन्धि छिन्धि।
चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्२६
भगवान् की श्रेष्ठ तलवार ! आपकी धार बहुत तीक्ष्ण हैआप भगवान् की प्रेरणा से मेरे शत्रुओं को छिन्न-भिन्नकर दिजिये।भगवान् की प्यारी ढाल ! आपमेंसैकड़ों चन्द्राकार मण्डल हैं आपपापदृष्टि पापात्मा शत्रुओं की आँखे बन्द कर दिजियेऔर उन्हें सदा के लिये अन्धा बना दीजिये ।।२६
यन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च।
सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा ।।२७
सर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्।
प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः ।।२८
सूर्य आदि ग्रह, धूमकेतु (पुच्छल तारे ) आदि केतु, दुष्टमनुष्य, सर्पादि रेंगने वाले जन्तु, दाढ़ोंवाले हिंसक पशु,भूत-प्रेत आदि तथा पापी प्राणियों से हमें जो-जो भय हो और जो हमारे मङ्गल के विरोधी हों – वेसभी भगावान् के नाम, रूप तथा आयुधों का कीर्तनकरने से तत्काल नष्ट हो जायें ।।२७-२८
गरूड़ो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।
रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः ।।२९
बृहद्, रथन्तर आदि सामवेदीय स्तोत्रों सेजिनकी स्तुति की जाती है, वे वेदमूर्ति भगवान् गरूड़और विष्वक्सेनजी अपने नामोच्चारण के प्रभाव से हमेंसब प्रकार की विपत्तियों से बचायें।।२९
सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।
बुद्धिन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः ।।३०
श्रीहरि के नाम, रूप, वाहन, आयुध और श्रेष्ठ पार्षदहमारी बुद्धि , इन्द्रिय , मन और प्राणों को सबप्रकार की आपत्तियों से बचायें।।३०
यथा हि भगवानेव वस्तुतः सद्सच्च यत्।
सत्यनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपाद्रवाः ।।३१
जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है, वह वास्तवमें भगवान् ही है इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रवनष्ट हो जायें।।३१
यथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्।
भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया ।।३२
तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरिः।
पातु सर्वैः स्वरूपैर्नः सदा सर्वत्र सर्वगः ।।३३
जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकता का अनुभव कर चुकेहैं, उनकी दृष्टि में भगवान् का स्वरूप समस्त विकल्पों सेरहित है-भेदों से रहित हैं फिर भी वेअपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण, आयुध और रूपनामक शक्तियों को धारण करते हैं यह बात निश्चित=रूप से सत्य है इस कारण सर्वज्ञ, सर्वव्यापक भगवान्श्रीहरि सदा -सर्वत्र सब स्वरूपों से हमारी रक्षा करें।।३२-३३
विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्तादन्तर्बहिर्भगवान्नारसिंहः।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन ग्रस्तसमस्ततेजाः ।।३४जो अपने भयंकर अट्टहास से सब लोगों के भयको भगा देते हैं और अपनेतेज से सबका तेज ग्रस लेते हैं, वेभगवान् नृसिंह दिशा -विदिशा में, नीचे -ऊपर, बाहर-भीतर – सब ओर से हमारी रक्षा करें ।।३४
मघवन्निदमाख्यातं वर्म नारयणात्मकम्।
विजेष्यस्यञ्जसा येन दंशितोऽसुरयूथपान् ।।३५
देवराज इन्द्र ! मैने तुम्हें यह नारायण कवच सुना दिया हैइस कवच से तुम अपने को सुरक्षित कर लो बस, फिर तुमअनायास ही सब दैत्य – यूथपतियों को जीत करलोगे ।।३५
एतद् धारयमाणस्तु यं यं पश्यति चक्षुषा।
पदा वा संस्पृशेत् सद्यः साध्वसात् स विमुच्यते ।।३६
इस नारायण कवच को धारण करने वाला पुरूषजिसको भी अपने नेत्रों से देख लेता है अथवा पैर से छूदेता है, तत्काल समस्त भयों से से मुक्त हो जाता है 36
न कुतश्चित भयं तस्य विद्यां धारयतो भवेत्।
राजदस्युग्रहादिभ्यो व्याघ्रादिभ्यश्च कर्हिचित् ।।३७
जो इस वैष्णवी विद्या को धारण कर लेता है, उसेराजा, डाकू, प्रेत, पिशाच आदि और बाघआदि हिंसक जीवों से कभी किसी प्रकार का भयनहीं होता ।।३७
इमां विद्यां पुरा कश्चित् कौशिको धारयन्द्विजः।
योगधारणया स्वाङ्गं जहौ स मरूधन्वनि ।।३८
देवराज! प्राचीनकाल की बात है, एक कौशिकगोत्री ब्राह्मण ने इस विद्या को धारण करकेयोगधारणा से अपना शरीर मरूभूमि में त्याग दिया ।।३८
तस्योपरि विमानेन गन्धर्वपतिरेकदा।
ययौ चित्ररथः स्त्रीर्भिवृतो यत्र द्विजक्षयः ।।३९
जहाँ उस ब्राह्मण का शरीर पड़ा था, उसके उपर से एकदिन गन्धर्वराज चित्ररथ अपनी स्त्रियों के साथविमान पर बैठ कर निकले।।३९
गगनान्न्यपतत् सद्यः सविमानो ह्यवाक् शिराः।
स वालखिल्यवचनादस्थीन्यादाय विस्मितः।
प्रास्य प्राचीसरस्वत्यां स्नात्वा धाम स्वमन्वगात् ।।४०
वहाँ आते ही वे नीचे की ओर सिर किये विमान सहितआकाश से पृथ्वी पर गिर पड़े इस घटना से उनके आश्चर्यकी सीमा न रही जब उन्हें बालखिल्य मुनियों नेबतलाया कि यह नारायण कवच धारण करनेका प्रभाव है, तब उन्होंने उस ब्राह्मण देव=की हड्डियों को ले जाकर\\\पूर्ववाहिनी सरस्वती नदी में प्रवाहित कर दिया औरफिर स्नान करके वे अपने लोक को चले गये ।।४०
।।श्रीशुक उवाच।।
य इदं शृणुयात् काले यो धारयति चादृतः।
तं नमस्यन्ति भूतानि मुच्यते सर्वतो भयात् ।।४१
श्रीशुकदेवजी कहते हैं – परिक्षित् जो पुरूष इस
नारायण कवच को समय पर सुनता है और जो आदर पूर्वकइसे धारण करता है, उसके सामने सभी प्राणी आदर सेझुक जाते हैं और वह सब प्रकार के भयों से मुक्तहो जाता है ।।४१
एतां विद्यामधिगतो विश्वरूपाच्छतक्रतुः।
त्रैलोक्यलक्ष्मीं बुभुजे विनिर्जित्यऽमृधेसुरान् ।।४२
परीक्षित् ! शतक्रतु इन्द्र ने आचार्य विश्वरूपजी से यहवैष्णवी विद्या प्राप्त करके रणभूमि मेंअसुरों को जीत लिया और वे
त्रैलोक्यलक्ष्मी का उपभोग करने लगे 42
।।इति श्रीनारायणकवचं सम्पूर्णम्।।
( श्रीमद्भागवत स्कन्ध 6 , अ। 8 )

रविवार, 12 अक्टूबर 2014

==== देश सोने की चिड़ियाँ था === जब चिड़ियाँ जैसा दीखता था

==== देश  सोने की चिड़ियाँ था === जब चिड़ियाँ जैसा दीखता था = अब ..हाथ फैलाएं ..? 
===== वक्त आने को हे जब हम अपने भूगोल को सुधारें == उन्नति की और बड़े \\
---यदि हम जैसलमेर से बाड़मेर होकर भुंज तक जो भाग राजस्थन - गुजरात की सीमा के अन्दर पाकिस्तान का आता हे , जो इधर घुसा हुवा हे , उसको एक सीध में ले ले याने की , संघार ,मीरपुर खास ,शेख भीर्यखियों , बदीन, तक का क्षेत्र अपनी सीमा में मिला ले , तो उसका बार बार का विवाद करना ही समाप्त हो जायेगा , याने की उसके हैदराबाद प्रान्त का पश्चिमी हिस्सा \\ और हमारे देश के वास्तु के साथ उनका वास्तु भी सुधर जायेगा \\
-- १८७६ के अफगानिस्तान के विभाजन से लेकर  १९६२ के अक्षय सियाचिन के चीन पर कब्जे के साथ आज तक १० बार देश की सीमायें और हमारा भूगोल बदला जा चूका हे , सोने की चिड़ियाँ से , एक बाहें फहलाएं व्यक्ति की तरह से खड़ा दिखाई देने लगा हे ,पूर्वोत्तर और सम्पूर्ण पश्चिमोत्तर बदल चूका हे , दक्षिण में केवल श्रीलंका ही बदला हे , यु भी वह चिड़ियाँ के अंडें की भांति था जो की आज दूर हे , \

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

=== sheyar bajar or sona chandee

=== sheyar bajar or sona chandee 
=== ओम श्री गणेशाय नमः == द्वितीयां = 10 =10  = 2014  -----आज का  शुभ अंक = 3 -5 -8
====== बाजार में ऊपर . नीचे होने का समय == 10  .40   == 12 . 30  == 2 .20  ==
=== सेंसेक्स = 26500  से 26750 = ----- 7 शेषन में 1000  गिरने की स्थिति यथावत यह भी संभव की यह 27100 तक ऊपर इन आने वाले 4  शेषन में चढ़े फिर गिरे और 26300  वापस आने वाले सप्ताहांत में आये 
=== सोना 26800  से 27100   ==== बाजार बदलाव का समय दोपहर 11 = 30  = बाद में 5 .10  
=== चांदी = 38500  से 39100 ==
=== क्रूड == 5150  से 5200  ===== अपनी जिम्मेदारी पर ही कार्य करे == हमारी कोई जिम्मेदारी नही हे \\
===== 0  99  260  -770  10  

सोमवार, 22 सितंबर 2014

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti


आप , आपके बच्चे या परिवार का कोई अन्य , आपके पति =भाई = कोई भी बहुत अधिक काम-वासना में लिप्त हो जाये , परिवार की और ध्यान न दे , या पेसो को ही सब कुछ मन बैठे , तब आप उनसे यह पथ नित्य पढ़ने का कहे \ कुछ ही दिनों में मानसिकता में बदलाव होगा == मेरा आजमाया प्रयोग हे \\ 

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti 



नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं
ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निगुर्णं निर्विकल्पं निरीहं
i 
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं ।। 1।।
निराकारमोंकालमूलं तुरीयं। गिराग्यान
गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकालकालं कृपालं। गुणा गार
संसारपारं नतोअहं।। 2।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।
मनोभूतकोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसदभाल
बालेन्दु कंठे भुजंगा ।। 3।।
चलत्कुंडलं भू्र सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं
दयालमं।
मृगाद्दीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं
सर्वनाथं भजामि ।। 4।।
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशम्। अखण्डं अजं
भनुकोटिप्रकाशं।
त्रय: शूल निमूर्लनं शूलपाणिं। भजेअहं
भवानीपतिं भावगम्यं ।। 5।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
सदा सच्चिदानन्द दाता पुरारी।
चिदानंद संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद
प्रभो मन्मथारी।। 6।।
न यावद उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके
परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद
प्रभो सर्वभूताद्दिवासं।। 7।।
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोअहं
सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं।
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ।। 8।।
श्लोक – रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भु: प्रसीदते ।। 9
स्वामी आनंद शिव मेहता = 099260 -77010