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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

panchak , पंचक क्या होता है , धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वाभाद्रपद व रेवती नक्षत्र

जानें सप्ताह के दिनों में शुरू होने  वाले  पंचक क्या प्रभाव   होता है

भारतीय ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है। इसके अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती    नक्षत्र आते हैं। पंचक के दौरान कुछ विशेष काम करने की मनाही है।का

रोग पंचक रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।

राज पंचक सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।

अग्नि पंचक मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है। इनसे नुकसान हो सकता है।
मृत्यु पंचक शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।

चोर पंचक शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।

इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।


 1. पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
2. पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
 3. पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है। 
4. पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है। 
5. पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश (एक प्रकार की घास) से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसा गरुड़ पुराण में लिखा है।

पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं। पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध। इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है।

1. घनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल संज्ञक माने जाते हैं। इनमें चलित काम करना शुभ माना गया है जैसे- यात्रा करना, वाहन खरीदना, मशीनरी संबंधित काम शुरू करना शुभ माना गया है। 2. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिर संज्ञक नक्षत्र माना गया है। इसमें स्थिरता वाले काम करने चाहिए जैसे- बीज बोना, गृह प्रवेश, शांति पूजन और जमीन से जुड़े स्थिर कार्य करने में सफलता मिलती है।
 3. रेवती नक्षत्र मैत्री संज्ञक होने से इस नक्षत्र में कपड़े, व्यापार से संबंधित सौदे करना, किसी विवाद का निपटारा करना, गहने खरीदना आदि काम शुभ माने गए हैं।
1. धनिष्ठा नक्षत्र में आग लगने का भय रहता है।09926077010 

 2. शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं। 
3. पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है। 
4. उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हैं।
 5. रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना

रविवार, 7 दिसंबर 2014

लड़के वालों को लड़की दिखाने का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय

लड़के वालों को लड़की दिखाने का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय 
== इस माह अधिकतर  रिश्तों हेतु  लड़के व लड़की देखने दिखाने  व परिचय सम्मलेन का होता हे \\
= सोमवार को = 11  से 12  == शाम  6  से 7 
= मंगलवार को - 3  से 4  बजे के मध्य में 
== बुधवार को = 12  से 1  और शाम 7  से 8 
== गुरुवार को = सुबह 9  से 10  और सायंकाल 4  से 5  के मध्य में  
== शुक्रवार को = दोपहर 1  से 2   और रात्रि में 8  से 9  के मध्य में 
== शनिवार को == सुबह 10  बजे से 11  के मध्य में == यदि लड़के वालो को इस समय लड़की दिखाई जाती हे तो वह उन्हें अतिशीघ्र पसंद आ जाती हे , इस तरह आपकी व्यर्थ की परेशानी बचती हे \\ जब भी लड़के वाले देखने आने वाले हो तब इस सरणी के समय में ही उन्हें दिखाने के लिया बुलवाये या इस तरह समय रखे की वह आपके यहाँ इस समय में ही पधारें \\ यह बहुत आजमाया हुवा समय हे \\विवाह ,सगाई , रिस्ता ,

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

=== sheyar bajar or sona chandee

=== sheyar bajar or sona chandee 
=== ओम श्री गणेशाय नमः == द्वितीयां = 10 =10  = 2014  -----आज का  शुभ अंक = 3 -5 -8
====== बाजार में ऊपर . नीचे होने का समय == 10  .40   == 12 . 30  == 2 .20  ==
=== सेंसेक्स = 26500  से 26750 = ----- 7 शेषन में 1000  गिरने की स्थिति यथावत यह भी संभव की यह 27100 तक ऊपर इन आने वाले 4  शेषन में चढ़े फिर गिरे और 26300  वापस आने वाले सप्ताहांत में आये 
=== सोना 26800  से 27100   ==== बाजार बदलाव का समय दोपहर 11 = 30  = बाद में 5 .10  
=== चांदी = 38500  से 39100 ==
=== क्रूड == 5150  से 5200  ===== अपनी जिम्मेदारी पर ही कार्य करे == हमारी कोई जिम्मेदारी नही हे \\
===== 0  99  260  -770  10  

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

mantr dosh ka nivaran

=== truant = mantr dosh ka nivaran == yah tinon alag alag he 
==== बाधा निवारण धुप == किसी प्रकार की रूकावट व्यापर स्थल पर हे तो इसकी धुनि देने से वह दोष हैट जाता हे \\==== नजर दोष निवारण धुप = बार बार नजर लगने से = इस धुप की धुनि से बच्चो और बड़ो को लगी नजर दूर हो जाती हे , कभी कभी घर में असमय विवाद होता हे उसका भी निवारण इस धुप से होता हे \\==== डिप्रेशन निवारण धुप == यह आज की भाषा हे हम इसको , प्रेत बाधा या , बहुत पालित का साया कहते हे , इससे ग्रसित व्यक्ति बहुत ही ज्यादा परेशान रहता हे , वह कुछ भी ठीक से कर नही पता हे , उसको समझ नही पड़ती हे , कभी कभी आपसी के जलने वाले भी कुछ कर देते हे , इस कारण भी तकलीफ होती हे , इस धुप की धुनि से इसमें कमी आती हे \ रोगी शांत रहता हे \\
===== यह सभी धुप 40 =50 ग्राम की पेक हे , मूल्य 250 रु प्रत्येक , पैसा मिलने पर कोरियर कर देते हे , मंगवाने के पहले एक बार बात आवस्य ही कर ले , अलग अलग समस्यावो के लिए अलग अलग ओषधियों का मिश्रण तैयार किया जाता हे , यह पूर्णतः पवित्र हे और वनस्पतियों ओषदीयों का मिश्रण चूर्ण रूप में हे \\ जिन्हे देवता आते हो वह , डिप्रेशन धुप का प्रयोग नही करें , देवता आना बंद हो जायेंगे या आने पर नाराज होंगे \\
=099260 ==77010
===== यह सभी धुप 40 =50 ग्राम की पेक हे , मूल्य 250 रु प्रत्येक , पैसा मिलने पर कोरियर कर देते हे , मंगवाने के पहले एक बार बात आवस्य ही कर ले , अलग अलग समस्यावो के लिए अलग अलग ओषधियों का मिश्रण तैयार किया जाता हे , यह पूर्णतः पवित्र हे और वनस्पतियों ओषदीयों का मिश्रण चूर्ण रूप में हे \\ जिन्हे देवता आते हो वह , डिप्रेशन धुप का प्रयोग नही करें , देवता आना बंद हो जायेंगे या आने पर नाराज होंगे \\=099260 ==77010