shiv pujan लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
shiv pujan लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 7 दिसंबर 2014

लड़के वालों को लड़की दिखाने का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय

लड़के वालों को लड़की दिखाने का सर्वोत्तम समय \ पहली बार में पसंद आने का समय 
== इस माह अधिकतर  रिश्तों हेतु  लड़के व लड़की देखने दिखाने  व परिचय सम्मलेन का होता हे \\
= सोमवार को = 11  से 12  == शाम  6  से 7 
= मंगलवार को - 3  से 4  बजे के मध्य में 
== बुधवार को = 12  से 1  और शाम 7  से 8 
== गुरुवार को = सुबह 9  से 10  और सायंकाल 4  से 5  के मध्य में  
== शुक्रवार को = दोपहर 1  से 2   और रात्रि में 8  से 9  के मध्य में 
== शनिवार को == सुबह 10  बजे से 11  के मध्य में == यदि लड़के वालो को इस समय लड़की दिखाई जाती हे तो वह उन्हें अतिशीघ्र पसंद आ जाती हे , इस तरह आपकी व्यर्थ की परेशानी बचती हे \\ जब भी लड़के वाले देखने आने वाले हो तब इस सरणी के समय में ही उन्हें दिखाने के लिया बुलवाये या इस तरह समय रखे की वह आपके यहाँ इस समय में ही पधारें \\ यह बहुत आजमाया हुवा समय हे \\विवाह ,सगाई , रिस्ता ,

सोमवार, 10 नवंबर 2014

===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें...

== पूजा पाठ व अन्य धार्मिक कार्यों के लिए कुछ नियम या सावधानियां हे जिससे हमें अधिकाधिक लाभ मिले इस हेतु हमे पूर्ववर्ती आचार्यों ने कुछ नियम बनाये हे , यह नियम सभी प्रायः जानते हे और अनोको लोगो ने इसको पोस्ट भी किया हे , हम भी इन नियमों से लाभ उठा ये
 ===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें........
.. पूजा साधना करते समय बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन पर सामान्यतः हमारा ध्या न नही जाता है लेकिन पूजा साधना की द्रष्टि से ये बातें अति महत्वपूर्ण हैं |
 1. गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं | भैरव की पूजा में तुलसी का ग्रहण नही है|
 2. कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोडकर निषेध है |
 3. बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नही करते |
 4. रविवार को दूर्वा नही तोडनी चाहिए |
 5. केतकी पुष्प शिव को नही चढ़ाना चाहिए |
6. केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें
 7. देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नही चाहिए 
 8. शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नही होता 
 9. जो मूर्ति स्थापित हो उसमे आवाहन और विसर्जन नही होता |
 10. तुलसीपत्र को मध्याहोंन्त्तर ग्रहण न करें |
 11. पूजा करते समय यदि गुरुदेव ,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें |
 12. मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है | 
13. कमल को पांच रात ,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है |
 14. पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है |
 15. शालिग्राम पर अक्षत नही चढ़ता | लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है |
 16. हाथ में धारण किये पुष्प , तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं |
 17. पिघला हुआ घृत और पतला चन्दन नही चढ़ाना चाहिए |
 18. दीपक से दीपक को जलाने से प्राणी दरिद्र और रोगी होता है | दक्षिणाभिमुख दीपक को न रखे | देवी के बाएं और दाहिने दीपक रखें | दीपक से अगरबत्ती जलाना भी दरिद्रता का कारक होता है |
 19. द्वादशी , संक्रांति , रविवार , पक्षान्त और संध्याकाळ में तुलसीपत्र न तोड़ें |
 20. प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढाएं |
 21. आसन , शयन , दान , भोजन , वस्त्र संग्रह , ,विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गयी है |
 22. जो मलिन वस्त्र पहनकर , मूषक आदि के काटे वस्त्र , केशादि बाल कर्तन युक्त और मुख दुर्गन्ध युक्त हो, जप आदि करता है उसे देवता नाश कर देते हैं |
 23. मिट्टी , गोबर को निशा में और प्रदोषकाल में गोमूत्र को ग्रहण न करें |
 24. स्त्री और शूद्र के शंख ध्वनि करने से मात्र रुष्ट और भयान्वित हो लक्ष्मी वहां से हट जाती है |
 25. पीपल को नित्य नमस्कार पूर्वाह्न के पश्चात् दोपहर में ही करना चाहिए | इसके बाद न करें |
 26. जहाँ अपूज्यों की पूजा होती है और विद्वानों का अनादर होता है , उस स्थान पर दुर्भिक्ष , मरण , और भय उत्पन्न होता है |
 27. पौष मास की शुक्ल दशमी तिथि , चैत्र की शुक्ल पंचमी और श्रावण की पूर्णिमा तिथि को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए लक्ष्मी का पूजन करें |
 28. कृष्णपक्ष में , रिक्तिका तिथि में , श्रवणादी नक्षत्र में लक्ष्मी की पूजा न करें | . मंडप के नव भाग होते हैं , वे सब बराबर-बराबर के होते हैं अर्थात् मंडप सब तरफ सबीे चतुरासन होता है | अर्थात् टेढ़ा नही होता | जिस कुंड की श्रृंगार द्वारा रचना नही होती वह यजमान का नाश करता है |

सोमवार, 22 सितंबर 2014

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti


आप , आपके बच्चे या परिवार का कोई अन्य , आपके पति =भाई = कोई भी बहुत अधिक काम-वासना में लिप्त हो जाये , परिवार की और ध्यान न दे , या पेसो को ही सब कुछ मन बैठे , तब आप उनसे यह पथ नित्य पढ़ने का कहे \ कुछ ही दिनों में मानसिकता में बदलाव होगा == मेरा आजमाया प्रयोग हे \\ 

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti 



नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं
ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निगुर्णं निर्विकल्पं निरीहं
i 
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं ।। 1।।
निराकारमोंकालमूलं तुरीयं। गिराग्यान
गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकालकालं कृपालं। गुणा गार
संसारपारं नतोअहं।। 2।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।
मनोभूतकोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसदभाल
बालेन्दु कंठे भुजंगा ।। 3।।
चलत्कुंडलं भू्र सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं
दयालमं।
मृगाद्दीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं
सर्वनाथं भजामि ।। 4।।
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशम्। अखण्डं अजं
भनुकोटिप्रकाशं।
त्रय: शूल निमूर्लनं शूलपाणिं। भजेअहं
भवानीपतिं भावगम्यं ।। 5।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
सदा सच्चिदानन्द दाता पुरारी।
चिदानंद संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद
प्रभो मन्मथारी।। 6।।
न यावद उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके
परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद
प्रभो सर्वभूताद्दिवासं।। 7।।
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोअहं
सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं।
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ।। 8।।
श्लोक – रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भु: प्रसीदते ।। 9
स्वामी आनंद शिव मेहता = 099260 -77010