shiv लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
shiv लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 1 अगस्त 2018

आप युवा हे , आपकी भी यह समस्या हे , चिंतित हे , पुराने रिश्ते से , तलाक की नौबत हे , लम्बे रिश्ते नहीं चल रहे हे ,, नौकरी में दिक्क्त हे

 आप युवा हे , आपकी भी यह समस्या हे , चिंतित हे , पुराने रिश्ते से , तलाक की नौबत हे , लम्बे रिश्ते नहीं चल रहे हे ,, नौकरी में दिक्क्त हे 


---- होता हे === चिंता न करो , उम्र ही ऐसी हे -- ईगो को छोड़ो 
आगे बड़ो == जो गया उसे भूल जावो == आने वाले जा स्वागत करो 
==== 75 प्रतिशत तलाक के मामलो में यही देखने में आता हे की आप  अपने पूर्व के रिश्तों को मित्रता को भूल नहीं पाते हो -- और मन विचलित होकर उससे तुलना  करने लगता हे , 
==== पहले आप जिम्मेदारी से मुक्त थे == आज जिम्मेदारी  में बंधे हो == विवाह एक जिम्मेदारी ही हे \
= आप कोई रिश्ते पहले बनाओ ही नहीं == बने हे तो साथ चलो == साथ न चल सके तो भूल जाये [
------- फिर भी मन में कोई तिस हे तो सलाह करे 
------- जो आपके अपने हे == या ज्योतिष से मिले -- गलत निर्णय न ले जीवन अमूल्य हे 
============ 9926077010 === शिव मेहता 
17   से  35 साल से कम के युवाओं के साथ कई तरह की समस्याएं होती हैं। ज्योतिष के अनुसार देखा जाए तो इस उम्र के लोगों में 5 कॉमन समस्याएं होती हैं।
 1. कन्फ्यूजन होना,
 2. व्यवहार में अस्थिरता होना,
 3. काम पर फोकस ना रहना, 
4. वाणी में प्रभाव नहीं होना और
 5. रिश्ते बार-बार टूटना। 
ये पांचों समस्या ज्योतिष में बताई गई हैं। कुछ लाइफ स्टाइल के कारण और कुछ ग्रहों के गोचर  के कारण अक्सर  17 से 35 साल की उम्र के लोगों को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिष में इन समस्याओं के बहुत आसान उपाय दिए गए हैं।मेरे  अनुसार कुछ आसान तरीकों से युवा अपने जीवन की इन समस्याओं को मिटा सकते हैं। वास्तव में ये समस्याएं राहु, शनि, बुध. चंद्र के दोषों के कारण होती हैं। राहु कन्फ्यूजन देता है, शनि कई बार आलस देता है और चंद्रमा के कारण मन में विचलन, दिमाग में अस्थिरता रहती है और बुध कमजोर होने से वाणी में प्रभाव नहीं रहता है। ऐसे में आपकी बात को अक्सर कोई महत्व नहीं दिया जाता। ये सभी परेशानियां ऐसी हैं जिन्हें बहुत बड़ा नहीं कह सकते हैं लेकिन अक्सर इनके कारण युवा डिप्रेशन तक के शिकार हो जाते हैं। जो लोग ज्योतिष में ज्यादा विश्वास नहीं करते हैं वो भी चाहें तो इन समस्याओं का आसानी से समाधान कर सकते हैं।

ये 5 काम अपने डेली रुटीन में शामिल करें
1 . मेडिटेशन - रोज सुबह कम से कम 5 से 10 मिनट मेडिटेशन जरूर करना चाहिए। ऊँ शब्द का लंबा उच्चारण करते हुए मेडिटेशन करें। धीरे-धीरे इसे 20 मिनट तक ले जाएं। इससे आपको एकाग्रता और काम या पढ़ाई में फोकस करने की जो परेशानी आ रही है वो दूर होगी।

2 . सूर्य को जल चढ़ाएं - सूर्य आत्मा के कारक माने गए हैं। अगर नहाने के बाद आप सूर्य को एक तांबे के लोटे से जल चढ़ाते हैं, तो ये प्रयोग आपमें आत्मविश्वास बढ़ाएगा। सूर्य आत्मविश्वास बढ़ाता है।

3 . गणपति के दर्शन - स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाने से पहले कोशिश करें कि गणपति के दर्शन कर लें। घर में ही गणपति की एक मूर्ति या तस्वीर लगा लें, घर से निकलने के पहले दर्शन करें। गणपति के दर्शन से आपको बुध का शुभ प्रभाव मिलेगा, इससे आपकी वाणी में प्रभाव बढ़ेगा।

4 . सुबह या शाम को करें जॉगिंग - शनि को श्रम पसंद है। इंसान के पसीने में भी शनि का वास माना गया है। अगर आप सुबह या शाम को 15 से 20 मिनट जॉगिंग या कोई और एक्सरसाइज करके पसीना बहाते हैं तो शनि आपको शुभ फल देगा।

रविवार, 17 जनवरी 2016

navgrah mantra , नवग्रह मंत्र , गृह शांती , दान , शांती पेड़ों की मूल से ,घरेलु टोटके , grah shantee , jado se shantee ,

, नवग्रह मंत्र , गृह शांती , दान , शांती पेड़ों की मूल से ,घरेलु टोटके ,  grah shantee , navgrah mantra , jado se shantee , saste dan , upay , totka , 

swami aannd shiv mehta , शिव मेहता , आनंद शिव मेहता 
grah shantee == vraksh mul se bhi 
ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
सूर्य==09926077010=
यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का होकर तुला राशि में है और केंद्र में या लग्नस्थ है तो कृत्तिका नक्षत्र वाले दिन बेल का एक जड़ प्रात:काल तोडक़र,शिवालय में शिवजी को समर्पित करें और
ऊँ भास्कराय ह्रीं
मंत्र का जाप करने के पश्चात गुलाबी धागे से धारण करें. प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहें. रोग,संतानहीनता जैसी अन्य कई समस्याओं का समाधान होगा.
चंद्र==ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
यदि आप की कुंडली में चंद्र नीच का होकर वृश्चिक राशि में है,या राहु,केतु और शनि द्वारा प्रभावित है तो, रोहिणी नक्षत्र वाले दिन खिरनी की जड़, शुद्ध करके शिवजी को समर्पित करें और
ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम:
मंत्र का जाप कर के सफेद धागे में धारण करें. फेफड़े सम्बंधित रोग,एकाकीपन और भावनात्मक समस्याओं का समाधान होगा.
मंगल==ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
आपकी कुंडली में मंगल नीच का होकर कर्क राशि में हो या आप मांगलिक हों तो मृगशिरा नक्षत्र वाले दिन अनंतमूल की जड़ शुद्धिकरण के पश्चात हनुमान जी की पूजा कर के\
ऊँ अं अंगारकाय नम:
मंत्र का जाप कर के नारंगी धागे से धारण करें. क्रोध,अवसाद और वैवाहिक बाधा से मुक्ति मिलेगी==099260770q0 बुध==ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
यदि आपकी कुंडली में बुध द्वादश,अष्टम भाव में या नीच का होकर मीन राशि में है, तो आप आश£ेषा नक्षत्र वाले दिन विधारा की जड़ गणेश भगवान को को समर्पित करने के पश्चात \
ऊँ बुं बुधाय नम:

मंत्र का जाप कर के हरे रंग के धागे में धारण करें. इस से बुद्धि विकसित होगी तथ निर्णय लेने में हो रही त्रुटि का भी समाधान होगा.
गुरु=ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर =
आपकी कुंडली में यदि गुरु रहु द्वरा युक्त है,राहु द्वारा ²ष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है,तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गाँठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करके धारण करें. व्यवसाय,नौकरी,विवाह सम्बन्धी समस्या और लीवर सम्बन्धी रोगों में लाभ होगा.
शुक्र==ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
यदि आपकी कुंडली में शुक्र अष्टम भाव में है या नीच का होकर कन्या राशि में है, तो आप सरपोंखा की जड़, भरणी नक्षत्र वाले दिन सफेद धागे से सायंकाल के समय लक्ष्मी जी का पूजन कर\
ऊँ शुं शुक्राय नम: === 
मंत्र का जाप कर के धारण करें. संतानहीनता,कर्ज की अधिकता और धन के अभाव जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी.09926077010 
शनि==ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
आपकी कुंडली में यदि शनि सूर्य युक्त है,सप्तम भाव में है या नीच का होकर मेष राशि में है तो आप अनुराधा नक्षत्र वाले दिन बिच्छू या बिच्छौल की घांस को नीले धागे से काली जी की पूजा के पश्चात \
ऊँ शं शनैश्चराय नम:
मंत्र का जाप कर के धारण करें. कार्यों में हो रहे विलम्ब,कानूनी अड़चन और रोगों से मुक्ति मिलेगी.

राहु====ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर 
आपकी कुंडली में राहु लग्न,सप्तम या भाग्य स्थान मे है, तथा शुभ ग्रहों से युक्त है तो आप आद्र्रा नक्षत्र वाले दिन चन्दन की लकड़ी का टुकड़ा शिव जी का अभिषेक कर के भूरे धागे में
ऊँ रां राहुए नम:
मंत्र का जाप कर के धारण करें. रोग,चिड़चिड़ापन,क्रोध,बुरी आदतों तथा अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी.
केतु== 09926077010 
यदि आपकी कुंडली में केतु,चन्द्र या मंगल युक्त होकर लग्नस्थ है, तो आप अश्विनी नक्षत्र वाले दिन गणेश जी का पूजन करने के पश्चात शुद्ध की हुई असगन्ध या अश्वगन्धा की जड़
, ऊँ कें केतवे नम:
मंत्र का जाप करने के पश्चात, नारंगी धागे से धारण करें. चर्म सम्बन्धी रोग,किडनी रोगों और वैवाहिक समस्याओं में लाभ होगा.
याद रखें कि समस्या की पूर्ण मुक्ति के लिये, आपको मंत्रों का जाप प्रतिदिन करना होगा.
grahon ka dan === sarv sulabh he yah apnaye 
ग्रह और उनसे सम्बन्धित दान समग्री
यदि आपको कोई ग्रह pida है,तो सम्बन्धित जड़ को धारण करने के पश्चात उस से सम्बन्धित वस्तुओं का लोगों को दान करने से भी लाभ होता है:
सूर्य :
माणिक्य, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चंदन, गुड़, केसर अथवा तांबा.
चंद्र :
बांस की टोकरी, चावल, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, घी से भरा पात्र, चांदी, मिश्री, दूध, दही.
मंगल 
: मूंगा, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, कनेर पुष्प, गुड़, तांबा, लाल चंदन, केसर.
बुध :09926077010 

हरे मूंग, हरा वस्त्र, हरा फल, पन्ना, केसर, कस्तूरी, कपूर, घी, मिश्री, धार्मिक पुस्तकें.
गुरू :
घी, शहद, हल्दी, पीत वस्त्र, शास्त्र पुस्तक, पुखराज, लवण, कन्याओं को भोजन.
शुक्र :
सफेद वस्त्र, श्वेत स्फटिक, चावल, सुगंधित वस्तु, कपूर, अथवा पुष्प, घी- शक्कर- मिश्री-दही.
शनि 
: तिल, सभी तेल, लोहा धातु, छतरी, काली गाय, काला कपड़ा, नीलम, जूता,कंबल.
राहु =09926077010 
: गेहूं, उड़द, काला घोड़ा, खडग़, कंबल, तिल, लौह, सप्त धान्य, अभ्रक.
केतु : 
तिल, कंबल, काला वस्त्र तथा पुष्प, सभी तेल, उड़द, काली मिर्च, सप्तधान्य.ka dan kare

शनिवार, 13 दिसंबर 2014

=== सिद्धी का भूत ===साधनाओ का संसार sadhna,seeddhee,bhut,pret,seeddh,

=== सिद्धी का भूत ===साधनाओ का संसार ==
          किसी व्यक्ति को साधनाओ को संपन्न करने का और प्रसिद्ध होने को शोक लगा = व पूजा पाठ करने लगा बहुत ज्यादा समय इसमें लगाने लगा \\
 == किसी ने उसको हनुमान जी की विधि बताई और यह भी बताया की इसमें संयम से रहते हे , उनकी पत्नी भी थी , कुछ ही दिनों में उन्हें एक संयमी प्रेत ने पकड़ लिया = उनकी भाषा में लिखे तो उन्हें सिद्धी हो गयी == अक्सर अनेको प्रेत-भुत अपनी सेवा के लिए लोगो को पकड़ लेते हे , और वह व्यक्ति उन्हीं की सेवा पूजा में लगा रहता हे \\ वह जो कहता हे वह होता हे उसको भविष्यवाणी का शोक लग जाता हे , उसकी वाणी में चमत्कार भी होते हे , आनेको रहस्यमय बातें भी वह बताता हे , और फिर होता हे इसका व्यापर आरम्भ = पहले वह साधक सेवा भावी ही होता हे फिर वह व्यापारी बनता जाता हे , उसके पास जुवारियो - सटोरियों की और आज के समय में वायदा बाजार वालों की लाइन लगती हे और बस == यह कुछ ही दिन चलता हे , फिर भविष्य बताने से उसका सत तेज नस्ट हो जाता हे \\ == इस तरह का व्यक्ति किसी प्रकार का कार्य या व्यवसाय नहीं करता हे = भगवन के नाम पर ही लोगो का दिया खाता हे , यदि व्यापर करें भी तो वह चलता नहीं हे , हाँ यदि नौकरी हो तो बात अलग हे ,\ == अब उनके संयम से पत्नी व्यथित उनका मन तो वह जाता नहीं और पत्नी की व्यथा - उसकी विरह वेदना और साहचर्य की चेस्टा बड़ी विलक्षण स्थिति == अब वह महाशय अलग कमरे में सोने लगे = कारण था की किसी दिन संयम जवाब दे गया और वह कुछ दिनों तक शक्ति विहीन से हो गए = फिर क्या नारी नरक का द्वार नजर आने लगी और क्या ........ पत्नी अन्यत्र ..... == अब यह महिलावों से भुत दूर रहते = उन्हें अपने पास भी नहीं आने देते = और बात किसी महिला से नहीं करते = किसी स्त्री को पैर भी नहीं छूने देते == इसका भी कारन था की स्त्री के पैर को हाथ लगाने के बाद उनकी काम चेस्टा तत्काल बाद जाती कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता और वह विचलित हो जाते और पत्नी से साहचर्य कर नहीं सकते सो हस्ताचार से ऊर्जा को नस्ट करने से ही शांति मिलती यह भी दुःख \\ == अब पत्नी के हाथ का बनाया खाना भी नहीं खाए स्वयं ही बनाये = परिवार भी और रिस्तेदार भी दुःखी मगर वह बड़े ही प्रशन्न की लोग तारीफ करते हे \\ == और इस तरह साधना ने उनका जीवन ही बदल दिया == स्वर्ग था यह या नरक समझ नहीं आता उन्हें किन्तु वह जानते थे की वह मोक्षगामी हे और परमात्मा के पास जायेंगे \\ == किन्तु वास्तव में यह एक बीमारी ही हे जो ठीक हो सकती हे , यह प्रेत बाधा ही हे , जो की किसी पूजा पति की आत्मा का प्रवेश हे \\ इस तरह यदि किसी बेवड़े की आत्मा लग जाये तो वह आदमी शराबी हो जाता हे , और यदि आत्मा किसी नीच आदमी की लग जाये तो वह नीच ही बन जता हे \\ किसी ज्योतिष की आत्मा लग जाये तो वह ज्योतिष हो जाता हे \\ किसी पंडित की आत्मा लग जाये तो आदमी पूजा पाठी बन जाता हे \\ जब भी कोई व्यक्ति अपनी आदत के विपरीत कार्य करने लग जाये तो समझो की किसी अन्य के असर में यह आ चूका हे \\ और यह कभी कभी नहीं होता हे यह उसकी महादशा के बदलने या अंतर दशा बदलने पर ही होता हे , यह यदि राहु के प्रभाव से हो तो वह शराबी = कबाबी सिद्ध , गुरु से हो तो अत्यंत धार्मिक पूजा पाठी , सूर्य से हो तो अत्यंत प्रभावशाली तेजस्वी गुरु , मंगल से हो तो हिंसक गुस्सेल सिद्ध , शुक्र से होतो धनात्मक संत या सिद्ध जिसका मन धन में लगा रहे , बुध से हो तो ज्ञानी विद्वान और ज्योतिष संत साधु या सिद्ध , शनि से हो तो नपुंसक ,त्यागी,तपस्वी,संत,सिद्ध प्रसिद्ध सन्यासी,वस्त्र विहीन संत बनता हे या इसी तरह की आत्मा उसको लगती हे \\ यह एक बीमारी ही हे जो ठीक हो जाती हे , \\ किन्तु आसानी से ठीक नहीं होती हे \\ इसका इलाज आधुनिक विज्ञानं के पास नहीं हे , और न ही कोई इलाज इनके पास हे , इस तरह की बीमारी को वह मानसिक रोग और डिप्रेशन कहते हे और उनके पास इसका एक ही इलाज हे , नींद की गोली या दवाई , इनका मन्ना हे की यह सो जायेगा तो ठीक हो जायेगा , किन्तु महीनो के इलाज से भी यह ठीक नहीं होते हे == इनको किसी जानकर , सिद्ध को दिखया जय तो यह कुछ ही समय में ठीक हो जाते हे == इस तरह की बीमारी अस्त केतु के समय या भीत अवस्था के समय प्रभावकारी होती हे \\ राम राम \\ === यहाँ तक पड़ने पर जो भी विचार आपको आये , वह अपनी स्वतंत्र पोस्ट बनाकर ही व्यक्त करे , कोई कॉमेंट , सलाह , विद्वत्ता या खुशी=दुःख व्यक्त नहीं करे , इससे लोग भटकते हे == यह भी संभव हे की आप हमसे ज्यादा ही जानते हे , और विद्वान भी आप हे ही \\ 09926077010 =

सोमवार, 10 नवंबर 2014

===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें...

== पूजा पाठ व अन्य धार्मिक कार्यों के लिए कुछ नियम या सावधानियां हे जिससे हमें अधिकाधिक लाभ मिले इस हेतु हमे पूर्ववर्ती आचार्यों ने कुछ नियम बनाये हे , यह नियम सभी प्रायः जानते हे और अनोको लोगो ने इसको पोस्ट भी किया हे , हम भी इन नियमों से लाभ उठा ये
 ===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें........
.. पूजा साधना करते समय बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन पर सामान्यतः हमारा ध्या न नही जाता है लेकिन पूजा साधना की द्रष्टि से ये बातें अति महत्वपूर्ण हैं |
 1. गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं | भैरव की पूजा में तुलसी का ग्रहण नही है|
 2. कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोडकर निषेध है |
 3. बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नही करते |
 4. रविवार को दूर्वा नही तोडनी चाहिए |
 5. केतकी पुष्प शिव को नही चढ़ाना चाहिए |
6. केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें
 7. देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नही चाहिए 
 8. शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नही होता 
 9. जो मूर्ति स्थापित हो उसमे आवाहन और विसर्जन नही होता |
 10. तुलसीपत्र को मध्याहोंन्त्तर ग्रहण न करें |
 11. पूजा करते समय यदि गुरुदेव ,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें |
 12. मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है | 
13. कमल को पांच रात ,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है |
 14. पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है |
 15. शालिग्राम पर अक्षत नही चढ़ता | लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है |
 16. हाथ में धारण किये पुष्प , तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं |
 17. पिघला हुआ घृत और पतला चन्दन नही चढ़ाना चाहिए |
 18. दीपक से दीपक को जलाने से प्राणी दरिद्र और रोगी होता है | दक्षिणाभिमुख दीपक को न रखे | देवी के बाएं और दाहिने दीपक रखें | दीपक से अगरबत्ती जलाना भी दरिद्रता का कारक होता है |
 19. द्वादशी , संक्रांति , रविवार , पक्षान्त और संध्याकाळ में तुलसीपत्र न तोड़ें |
 20. प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढाएं |
 21. आसन , शयन , दान , भोजन , वस्त्र संग्रह , ,विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गयी है |
 22. जो मलिन वस्त्र पहनकर , मूषक आदि के काटे वस्त्र , केशादि बाल कर्तन युक्त और मुख दुर्गन्ध युक्त हो, जप आदि करता है उसे देवता नाश कर देते हैं |
 23. मिट्टी , गोबर को निशा में और प्रदोषकाल में गोमूत्र को ग्रहण न करें |
 24. स्त्री और शूद्र के शंख ध्वनि करने से मात्र रुष्ट और भयान्वित हो लक्ष्मी वहां से हट जाती है |
 25. पीपल को नित्य नमस्कार पूर्वाह्न के पश्चात् दोपहर में ही करना चाहिए | इसके बाद न करें |
 26. जहाँ अपूज्यों की पूजा होती है और विद्वानों का अनादर होता है , उस स्थान पर दुर्भिक्ष , मरण , और भय उत्पन्न होता है |
 27. पौष मास की शुक्ल दशमी तिथि , चैत्र की शुक्ल पंचमी और श्रावण की पूर्णिमा तिथि को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए लक्ष्मी का पूजन करें |
 28. कृष्णपक्ष में , रिक्तिका तिथि में , श्रवणादी नक्षत्र में लक्ष्मी की पूजा न करें | . मंडप के नव भाग होते हैं , वे सब बराबर-बराबर के होते हैं अर्थात् मंडप सब तरफ सबीे चतुरासन होता है | अर्थात् टेढ़ा नही होता | जिस कुंड की श्रृंगार द्वारा रचना नही होती वह यजमान का नाश करता है |

रविवार, 12 अक्टूबर 2014

==== देश सोने की चिड़ियाँ था === जब चिड़ियाँ जैसा दीखता था

==== देश  सोने की चिड़ियाँ था === जब चिड़ियाँ जैसा दीखता था = अब ..हाथ फैलाएं ..? 
===== वक्त आने को हे जब हम अपने भूगोल को सुधारें == उन्नति की और बड़े \\
---यदि हम जैसलमेर से बाड़मेर होकर भुंज तक जो भाग राजस्थन - गुजरात की सीमा के अन्दर पाकिस्तान का आता हे , जो इधर घुसा हुवा हे , उसको एक सीध में ले ले याने की , संघार ,मीरपुर खास ,शेख भीर्यखियों , बदीन, तक का क्षेत्र अपनी सीमा में मिला ले , तो उसका बार बार का विवाद करना ही समाप्त हो जायेगा , याने की उसके हैदराबाद प्रान्त का पश्चिमी हिस्सा \\ और हमारे देश के वास्तु के साथ उनका वास्तु भी सुधर जायेगा \\
-- १८७६ के अफगानिस्तान के विभाजन से लेकर  १९६२ के अक्षय सियाचिन के चीन पर कब्जे के साथ आज तक १० बार देश की सीमायें और हमारा भूगोल बदला जा चूका हे , सोने की चिड़ियाँ से , एक बाहें फहलाएं व्यक्ति की तरह से खड़ा दिखाई देने लगा हे ,पूर्वोत्तर और सम्पूर्ण पश्चिमोत्तर बदल चूका हे , दक्षिण में केवल श्रीलंका ही बदला हे , यु भी वह चिड़ियाँ के अंडें की भांति था जो की आज दूर हे , \

सोमवार, 22 सितंबर 2014

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti


आप , आपके बच्चे या परिवार का कोई अन्य , आपके पति =भाई = कोई भी बहुत अधिक काम-वासना में लिप्त हो जाये , परिवार की और ध्यान न दे , या पेसो को ही सब कुछ मन बैठे , तब आप उनसे यह पथ नित्य पढ़ने का कहे \ कुछ ही दिनों में मानसिकता में बदलाव होगा == मेरा आजमाया प्रयोग हे \\ 

shiv pujan ,nshamukti , shukh - shanti 



नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं
ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निगुर्णं निर्विकल्पं निरीहं
i 
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं ।। 1।।
निराकारमोंकालमूलं तुरीयं। गिराग्यान
गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकालकालं कृपालं। गुणा गार
संसारपारं नतोअहं।। 2।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।
मनोभूतकोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसदभाल
बालेन्दु कंठे भुजंगा ।। 3।।
चलत्कुंडलं भू्र सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं
दयालमं।
मृगाद्दीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं
सर्वनाथं भजामि ।। 4।।
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशम्। अखण्डं अजं
भनुकोटिप्रकाशं।
त्रय: शूल निमूर्लनं शूलपाणिं। भजेअहं
भवानीपतिं भावगम्यं ।। 5।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
सदा सच्चिदानन्द दाता पुरारी।
चिदानंद संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद
प्रभो मन्मथारी।। 6।।
न यावद उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके
परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद
प्रभो सर्वभूताद्दिवासं।। 7।।
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोअहं
सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्म दु:खौघतातप्यमानं।
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ।। 8।।
श्लोक – रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भु: प्रसीदते ।। 9
स्वामी आनंद शिव मेहता = 099260 -77010