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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

numerology , ,1, 2, 3, 4, 5, न्यूमरोलॉजी के अनुसार हर अंक की कुछ खासियत

 मूलांक  -1,2,3,4,5,6,7,8,

1 ank 

न्यूमरोलॉजी के अनुसार हर अंक की कुछ खासियत होती है और कुछ कमियां, इसी तरह हर मूलांक के लिए कुछ सावधानियां बताई गयी है, आज बात करते मूलांक (birthday 1, 10, 19, 28 ) वाले लोगों को किस किस चीज़ या कामों से बचना चाहिए जिससे इन्हे परेशानी न आये. आइये जानते है.  -09926077010 

मूलांक 1 वाले लोगों को झूठा दिखावा या गैर जरूरी खर्चा करने से बचना चाहिए। साथ ही दोस्तों और रिश्तेदारो के ऊपर लापरवाह होक नही लुटाना चाहिए. ऐसा करने से इनका बजट बिगड़ जाता है. 
ऐसे लोगों को अनुमान लगाने वाले काम जिसे जुआ, सट्टा ठीक नही रहते ज्यादा होने पर गरीबी का मुह दिखा देते है. बहुत ज्यादा स्वतंत्र न होए अपने आप को बांधे रखे. 
ऐसे लोग बहुत ज्यादा रिस्क ले जाते है जिससे इन्हे बचना चाहिए. एक परेशानी और है के ये लोग किसी किसी वयक्ति पर अपने से ज्यादा भरोसा कर लेते है जो की गलत है.

इसके अलावा sensuality और  गैर जरूरी रिश्तों से बचे नही तो  बदनामी आ सकती है.\

मूलांक 2 (birth date 2,11,20,29) चन्द्र से प्रभावित रहता है. मन का कारक होने की वजह से ऐसे कभी कभी छोटी छोटी बातों से ही अपना confidence खो बैठते है. आइये जानते है मूलांक 2 वाले लोगो को लाइफ में किन किन बातों और कामों से बचना चाहिए.  -

मूलांक 2 वाले लोगों को अपना साहस नही खोना चाहिए। ऐसा देखा जाता है के कोई भी इन्हे discourage कर देता है और ये हो जाते है. ऐसा देखा जाता है के ये आसानी से किसी की भी तरफ आकर्षित हो जाते है जो की नुकसान देता है.
अगर आपने कोई काम किया है या फैसला लिया है तो उसी पे टिकना चाहिए, किसी भी काम को ठंडे दिमाग से और बिना जल्दबाज़ी के करना ज्यादा अच्छा रहता है.साथ ही ऐसे लोगों को अपना काम दूसरों की कारण नही छोड़ना चाहिए साथ ही अपना ज्यादा समय दूसरों की हेल्प में नही बिताना चाहिए अगर की फायदा नही है तो. इन्हे झूठी तारीफ करने वाले दोस्तों से बचना चाहिए. 
पूर्णिमा के दिन इन्हे जरूरी फैसले लेने से बचना चाहिए. ऐसे दिन इनका दिमाग खराब भी रह सकता है
मूलांक 3 (birth date 3,12,21,30) बृहस्पति से प्रभावित होता है ऐसे लोगों को फालतू बहस में नही पड़ना चाहिए और साथ ही अपने ऊपर या अपनी विद्या पे घमंड इनका सबसे बड़ा दुश्मन होता है. आइये जानते है और किन किन चीज़ो से बचना चाहिए मूलांक 3 वाले लोगो को. 
मूलांक 3 वाले बंधुओ को खर्चा करते समय ध्यान देना चाहिए. ऐसा देखा जाता है के पैसा इनके पास आराम  से आ जाता है लेकिन गैर जरूरी खर्चे करने से पैसा चला भी जाता है.  बहुत ज्यादा खाने व् तीखा खाने की आदत से बचना चाहिए. इन्हे गुस्से पर काबू रखना आ जाये तो बहुत अच्छा फल मिलता है और साथ ही इन्हे अपने जीवनसाथी की इज़्ज़त करनी चाहिए.  इन लोगों को चाहे जितना भी मान सम्मान मिले लेकिन उसके ऊपर घमंड नही करना चाहिए. बहुत ज्यादा काम करने के कारण इन्हे स्ट्रेस भी हो सकता है. discipline की कमी इनमे देखि जाती है.  इन्हे भविष्य के लिए इन्वेस्टमेंट जरूर करनी चाहिए जितनी जल्दी ये शुरू करे उतना आगे चलके  फायदा हगा. इन  लोगों नीच लोगों से दुरी बनानी चाहिए नही तो खुद भी नीच बन जाएंगे और साथ ही दिमागी शांति से जाएंगे
मूलांक 4 राहु (birthday 4,13,22,31 ) से प्रभावित अंक माना जाता है. ऐसे लोगों को दूसरे लोगों पर भरोसा करना सीखना चाहिए और साथ ही जिंदगी के लिए less critical approach develop करनी चाहिए. आइये जानते है और क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए मूलांक 4 वाले लोगों को.
मूलांक 4 वाले लोगो को अकेला और अलग थलग रहने की आदत से बचना चाहिए. ये लोग अगर हार जाये तो निराशावादी हो जाते है जो की एक गलत सोच को जन्म देती है, पॉजिटिव बने रहना ही मूलांक 4 वालों को लाइफ की प्रोब्लेम्स से बचा सकता है. 
ऐसे वयक्तियो को सख्त मिज़ाज़ या अधिक sensitive होना नुकसान दे सकता है.  आगे बढ़ने के लिए परेशानी इनकी लाइफ में पॉसिबल है इसके लिए तैयार रहना चाहिए. लाइफ में आने वाली opportunities को इन्हे पहचानना सीखना चाहिए क्यूंकि इनकी लाइफ में ये अचानक और थोड़े टाइम के लिए ही आती है.
ग है जिसका अंत loss से होता है सोच समझ व् किसी की सलाह से चले तो ज्यादा अच्छा रहेगा.
ऐसे लोगों को गुस्सा करना फायदा नही देगा, जितना creative ये लोग कमाने में हटे है उतना ही creative इन्हे खर्चने में होना चाहिए. पैसा जोड़ना बहुत फायदा देता है.जल्दी से फ्रेंड बनाने और जल्दी से उनसे नाता तोड़ने की आदत से बचें, मूलांक 4 के लोगों को अन्य वयक्तियों से दोस्ती उनकी बौद्धिक क्षमता और moral के ऊपर करनी ज्यादा फायदा देती है.
ये लो
 होना नुकसाभी नही करना चाहिए ऐसे लोग अगर अपनी जबान के पक्के हो जाये तो इन्हे तरक्की करने से कोई नही रोक सकता.न देगा सभी लोगों से आपकी बननी मुश्किल है, अपने spouse की सेहत का ख्याल रखे. जूठा वादा कअचानक फैसला करते है जो की मनमाना होता है और execution के समय ये दुविधा में पड़ जाते 

मूलांक 5 (birth date 5,14,23) बुध प्रभावित अंक वाले लोग बहुत जल्दी restless और बोर फील करने लगते है, साथ ही इन्हे ऐसी जगह में नही रहना चाहिए जहाँ दुःख और डिप्रेशन का माहौल हो. आइये जानते है और कहाँ और किन कामों से बचना चाहिए मूलांक 4 वाले लोगों को.
मूलांक 6 (birth date 6, 15, 24,) वाले लोगो शुक्र से प्रभावित होते है. ऐसे लोगों को आलसी होने से बचना चाहिए  साथ ही किसी पर भी भरोसा कर लेना इन्हे नुकसान देता है. आइये जानते है और क्या क्या avoid करना चाहिए 6 नंबर वालों कों 

मूलांक 7 (birth date 7,16,25) वाले लोग केतु से ज्यादा प्रभावित रहते है. ऐसे लोगों को किसी काम के सकारात्मक और नेगेटिव पहलु और उसमे लगने वाले समय का पहले से ज्ञान पहले से ले लेना चाहिए। बात करते है मूलांक 7 वाले लोगों को क्या क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए -
मूलांक 8 (birth date 8,17,26) वाले लोग शनि से प्रभावित होते है. ऐसे लोगों को आगे बढ़ने का प्रयास करते रहना चाहिए और साथ ही अपने दोस्तों और subordinates पर विश्वास करना चाहिए. आएं जानते है और मूलांक 8 वाले लोगों को क्या नही करना चाहिए



















सोमवार, 3 अगस्त 2015

पति केसा मिलेगा --- पत्नी किसी मिलेगी === शुख देने वाले - दुःख देनेवाले = कमानेवाले - निठल्ले

== पति केसा मिलेगा --- पत्नी किसी मिलेगी === शुख देने वाले - दुःख देनेवाले = कमानेवाले - निठल्ले 
== आपकी ही कुंडली निश्चित करती हे आपको जीवन साथी केसा मिलेगा और विवाह के बाद आपका जीवन उन्नति दायक होगा या कष्टकारी होगा या अत्यंत नारकीय होगा या ऐशोआराम का होगा 
=== यह आपके सप्तम के स्वामी पर निर्भर करता हे ----
=== सप्तम के स्वामी ग्रहनुसार आपको पति मिलेगा == सुन्दर , कला कलूटा , आकर्षक , नफरती , बहुत कमीना , बहुत ही प्रभावशाली समझदार 
=== किन्तु उस गृह की स्थितिनुसार वह होगा == सप्तम का स्वामी अष्ट हे तो आपका पति === होना न होना बराबर ही होगा आपके जीवन में उसका कोई स्थान नहीं होगा और न ही कोई प्रभाव होगा याने की पति का कोई मतलब नहीं केवल नाम का और साथ भी नहीं रहे या रहे तो शारीरिक रूप से अक्षम या झगड़ा करके अलग रहे 
=== पीड़ित होने प
र वह टोपीबाज होगा और उसके किये कामो से आपको दुःख होगा और अन्य लोग आपका नाजायज फायदा उठाएंगे \
==== स्वस्थ गर्वित मुदित होने पर आपको आपका पति अत्यंत ही वैभवशाली मिलेगा विवाह के पश्चात आप जितने भी दिन हैं परिवार से हो आपका राजसी समय ठीक हो जायेगा आपका प्रभाव और एस्वर्य निरंतर बढ़ता ही रहेगा आपको आमदनी के अनेक स्रोत होंगे ही === गर्वित सप्तम का स्वामी होने से आपके पति के कार्यों से आपको बहुत ही अधिक सम्मान मिलेगा और आपकी ख्याति फैलेगी ही और यदि यह एकदश हुवा तो मरते मरते भी आपके लिए पैसे वह देकर ही मरेगा याने उसकी मोत  के बाद भी आपको पैसा और लाभ मिलेगा ही \\
=== सप्तम का स्वामी द्वादशा हुवा तो आपको वह छोड़ देगा 
=== यह स्वामी छठे भाव में हुवा तो आप दोनों पति पत्नी == कुत्ते बिल्ली की तरह सदेव ही बिना बात के झगड़ते रहेंगे ही और आपकी किसी भी साथी सहयोगी नकट वाले से कभी नहीं पटेगी ही -- बगैर बात के आप विवाद करते रहेंगे ही यदि यह स्थिति हे तो आप अपनी पत्नी को दोषा न दे और न ही आप अपने पति को दोषा न दे और किसी भी मम्मले को टूल न दे \ तीसरे किसी व्यक्ति को बीच में न लए \\
\\\\\\\\\\ भूलकर भी आप दोनों मेसे कोई भी पुलिश केश न करे और न ही कभी कोर्ट कचहरी के चक्क्र में न पड़े यह स्थिति भी बने तो परिवार के सदस्यों द्वारा ही आपसी तालमेल से विवाद को सुलझाये पुलिस केश और कोर्ट केश होने से मामले परिवार सुलझते कम और टूटने की तो गारंटी हे ही 
==== यह स्थिति होने पर अपनी कुंडली जँचवाये और पंडित से सलाह करे वास्तविकता विवाद की जाने फिर आप उपाय करे या प्रयाश करे अपने जीवन को शुखमय बनाने का === 09926077010 
==जन्म पत्रिका देखने बताने का शुल्क हे == 
=== किन्ही मामलो में पति पत्नी की हत्या तक होती हे -- सप्तम का स्वामी तीसरे मंगल हेतो पति पत्नी में मार पिट बहुत होती हे खून तक निकलता हे == शनि हे तो विवाद बहुत और मारपीट == राहुमंगल हे तो पति मार मार कर हड्डी तक तोड़ देता हे और खूब खून भी निकलता हे हत्या भी होजाती हे 
=== सप्तम का स्वामी लग्न में और लग्न का स्वामी सप्तम में हे और शुक्रमंगल का योग हे तो पति पत्नी को मुख मिथुन करता ये ज्यादा  बहुत करवाने से भी विवाद होता हे =और विवाद का कारण पता ही नहीं चलता हे और परिवार उत जाता हे = पत्नी भी पति को मुख से ....जैसे वह फिल्म देखती हे वैसे ही प्रयोग करवाती हे 
=== बड़े व्यापर मेंस्वामी  बर्बादी होने का योग ==== खूब पैसा आने और चलेजाने का योग 
== महादशा का -- कमजोर हे अस्त हे पीड़ित हे == अंतर दशा का स्वामी मुदित गर्वित हे किन्तु 
== वह महा दशा के स्वामी स्व दववादश हे तो आपके पास पैसा बहुत आएगा और आप बहुत बड़ा कार्य व्यापर संपन्न करेंगे भविष्य में और आगे की आशा में किन्तु यह दववादश होने से 
== सारा का सारा व्यापर में आपका धन बर्बाद हो जाता हे या हो जायेगा == पैसा फंश जाता हे डूब जाता हे 
== स शुल्क जानकारी 09926077010 =

==आपके किसी भी गृह की दशा चल रही हो -- उससे अनरर दशा का स्वामी बारहवे हे तो आपको धन व्यय होगा ही \
== यदि महादशा का स्वामी उत्तम फल दाई हे तो धन आएगा और जायेगा 
== अंतर दशा का स्वामी उत्तम दशा में योगकारी हे तो धन बहुत आएगा और चला जायेगे 
== दशा स्वामी कमजोर हे = अंतर दशा स्वामी उत्तम स्थि में हे तो भी पैसा आएगा और सब चला जायेगा पास का भी 

== अंतर दशा का स्वामी कमजोर हे और महादशा का स्वामी भी जन्म का ठीक नहीं हे तो पैसा आएगा तो नहीं पास का भी चला जायेगा -- जो पास हे वह सब चला जायेगा और जो कुछ समेटते हे वह भी बिक जाएगी जिससे खर्च चलेगा ==== अामदानी होगी ही नही --- और रुक रुक कर होगी == उपाय करवाने से कुछ परिवर्तन हो किन्तु उपाय नहीं करवाने से भी यह समय बीतने पर आप की स्थिति -- उस गृह के बाद के गृह उत्तम योगकारी हे तो सुधर जाती हे नहीं हे योग करी तो और ख़राब हो जाती हे == 09926077010 ==पत्रिका देखने बताने का शुल्क 

रविवार, 19 जुलाई 2015

नवरात्री की साधना सिद्धि navratri ki sadhna ,kali , duga taaa

नवरात्री की साधना सिद्धि navratri ki sadhna 

गुप्त नवरात्री 

17 से 25 जुलाई 2015 तक 
और यह नियम और साधना प्रत्येक नवरात्री हेतु उपयोगी हे आप प्रत्येक नवरात्री में संपन्न कर सकते हे ।
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इस वर्ष गुप्त नवरात्री 17 जुलाई शुक्रवार से शुरू होकर 25 जुलाई शनिवार तक है 
● इस वर्ष गुप्त नवरात्री आषाढ़ मास की प्रतिपदा यानि 17 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई नवमी तक मान्य होगा ।
● हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।
गुप्त नवरात्र पूजा विधि
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गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
गुप्त नवरात्रि का महत्त्व
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● देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
● गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
● इस नवरात्री की समाप्ति के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं ,देवशयनी एकादसी से देवउठनी (देवप्रबोधनी )एकादसी के बीच चार माह को ऋषि परंपरा में विशेष महत्त्व प्राप्त है ! 
‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’। 
नौ शक्तियों से युक्त नवरात्रि कहलाते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं-
उक्तं – 
‘आश्विने वा ऽथवा माघे चैत्रें वा श्रावणेऽति वा।’
अर्थात आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि तथा चैत्र में वासंतिक नवरात्रि होते हैं। माघ व श्रावण के गुप्त नवरात्रि कहलाते हैं वहीं शारदीय नवरात्रि में देवी शक्ति की पूजा व बासंतिक नवरात्रि में विष्णु पूजा की प्रधानता रहती है…। 
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● प्रतिदिन नौ दिनों तक यम, नियम, संयम व श्रद्धा से मार्कण्डेय पुराण अंतर्गत दुर्गा सप्तशती का पाठ भक्तगण करते हैं।
‘नमो दैव्ये महादैव्ये, शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै, नियता प्रणताः स्मताम्‌’॥
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गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां
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● गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
● गुप्त नवरात्रि में सुबह या विशेष रूप से रात्रि में दिन के मुताबिक देवी के अलग-अलग स्वरूपों का ध्यान कर सामान्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
● पूजा में लाल गंध, लाल फूल, लाल वस्त्र, आभूषण, लाल चुनरी चढ़ाकर फल या चना-गुड़ का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर माता के नीचे लिखे मंत्र का नौ ही दिन कम से कम एक माला यानी 108 बार जप करना बहुत ही मंगलकारी होता है –
सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र प्रयोग॥
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र प्रयोग॥ (सदगुरुदेव जी ने आज तक जितने भी प्रयोग कराये है उन सब मे इस का पाठ जरूर किया है )
यह साधना किसी भी नवरात्रि से या किसी भी माह कि अष्टमी से शुरु किया जा सकता है । प्रातः उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर आसन बिछा कर पूर्व की मुंह कर बैठ जाय और सामने गुरु चित्र एवं भगवती दुर्गा चित्र स्थापित कर दे, फिर पात्र मे दुर्गा यंत्र रख कर उसे जल से स्नान करा कर, पोछ कर अलग पात्र मे स्तापित कर दे उस पर कुंकुम अक्षत पुष्प चढावे घी का दीपक व अगरबत्ती लगा देँ और फिर सिद्ध "कुंजिकास्त्रोत्र" का नित्य 108 पाठ 21 दिन तक करेँ । फिर 21 वाँ दिन पाठ कर किसी 1, 3, 5 या 9 कुमारी कन्याओ को भोजन करवे और यथोचित वस्त्र दक्षिणा आदि दे ।
ऐसा करने से साधना सम्पन्न होतो-होते साधक की मनोकामना पूर्ण होती है ।
इसमे महामृत्युंज्य , गणेश , महाकाली ,ज्वाला देवी ,रुद्र शक्ति , प्रकृति दस महाविद्याएं , जृम्भनी इत्यादि । भैरवी , खेचरी से लेकर पार्वती का भी इस स्तोत्र के द्वारा जागरण सम्पन्न हो जाता है । स्तम्भन , मारण , मोहन , शत्रुनाश , सिद्धि , प्राप्ति , विजय प्राप्ति , ज्ञान प्राप्ति अर्थात सभी क्षेत्रो मे प्रवेश की यह महाकुंजी है ।
प्रतिदिन प्रातःकाल सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् का पाठ कराने से सभी प्रकार के विघ्न – बाधा नष्ट हो जाते हैं व परम सिद्धि प्राप्त होती है| इसके पाठ से काम – क्रोध का मारण, इष्टदेव का मोहन, मन का वशीकरण, इन्द्रियों की विषय – वासनाओं का स्तम्भन और मोक्ष प्राप्ति हेतु उच्चाटन आदि कार्य सफल होते हैं|
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे || ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ||
नमस्ते रूद्ररुपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि |
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि || १ ||
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि || २ ||
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे |
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका || ३ ||
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते |
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी || ४ ||
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिणि || ५ ||
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी |
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु || ६ ||
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी |
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः || ७ ||
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा |
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा || ८ ||
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्र सिद्धं कुरुष्व मे || ९ |किसीपंडित से या गुरु से मार्गदर्शन अवस्य ही प्राप्त करे और फिर साधना में आये
साधना में हानी लाभ के स्वयं उत्तर दाई हे अपनी जिम्मेदारी पर ही करे ।

सोमवार, 10 नवंबर 2014

===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें...

== पूजा पाठ व अन्य धार्मिक कार्यों के लिए कुछ नियम या सावधानियां हे जिससे हमें अधिकाधिक लाभ मिले इस हेतु हमे पूर्ववर्ती आचार्यों ने कुछ नियम बनाये हे , यह नियम सभी प्रायः जानते हे और अनोको लोगो ने इसको पोस्ट भी किया हे , हम भी इन नियमों से लाभ उठा ये
 ===पूजा साधना में विशेष रूप से ध्यान रखें ये बातें........
.. पूजा साधना करते समय बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन पर सामान्यतः हमारा ध्या न नही जाता है लेकिन पूजा साधना की द्रष्टि से ये बातें अति महत्वपूर्ण हैं |
 1. गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं | भैरव की पूजा में तुलसी का ग्रहण नही है|
 2. कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोडकर निषेध है |
 3. बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नही करते |
 4. रविवार को दूर्वा नही तोडनी चाहिए |
 5. केतकी पुष्प शिव को नही चढ़ाना चाहिए |
6. केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें
 7. देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नही चाहिए 
 8. शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नही होता 
 9. जो मूर्ति स्थापित हो उसमे आवाहन और विसर्जन नही होता |
 10. तुलसीपत्र को मध्याहोंन्त्तर ग्रहण न करें |
 11. पूजा करते समय यदि गुरुदेव ,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें |
 12. मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है | 
13. कमल को पांच रात ,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है |
 14. पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है |
 15. शालिग्राम पर अक्षत नही चढ़ता | लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है |
 16. हाथ में धारण किये पुष्प , तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं |
 17. पिघला हुआ घृत और पतला चन्दन नही चढ़ाना चाहिए |
 18. दीपक से दीपक को जलाने से प्राणी दरिद्र और रोगी होता है | दक्षिणाभिमुख दीपक को न रखे | देवी के बाएं और दाहिने दीपक रखें | दीपक से अगरबत्ती जलाना भी दरिद्रता का कारक होता है |
 19. द्वादशी , संक्रांति , रविवार , पक्षान्त और संध्याकाळ में तुलसीपत्र न तोड़ें |
 20. प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढाएं |
 21. आसन , शयन , दान , भोजन , वस्त्र संग्रह , ,विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गयी है |
 22. जो मलिन वस्त्र पहनकर , मूषक आदि के काटे वस्त्र , केशादि बाल कर्तन युक्त और मुख दुर्गन्ध युक्त हो, जप आदि करता है उसे देवता नाश कर देते हैं |
 23. मिट्टी , गोबर को निशा में और प्रदोषकाल में गोमूत्र को ग्रहण न करें |
 24. स्त्री और शूद्र के शंख ध्वनि करने से मात्र रुष्ट और भयान्वित हो लक्ष्मी वहां से हट जाती है |
 25. पीपल को नित्य नमस्कार पूर्वाह्न के पश्चात् दोपहर में ही करना चाहिए | इसके बाद न करें |
 26. जहाँ अपूज्यों की पूजा होती है और विद्वानों का अनादर होता है , उस स्थान पर दुर्भिक्ष , मरण , और भय उत्पन्न होता है |
 27. पौष मास की शुक्ल दशमी तिथि , चैत्र की शुक्ल पंचमी और श्रावण की पूर्णिमा तिथि को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए लक्ष्मी का पूजन करें |
 28. कृष्णपक्ष में , रिक्तिका तिथि में , श्रवणादी नक्षत्र में लक्ष्मी की पूजा न करें | . मंडप के नव भाग होते हैं , वे सब बराबर-बराबर के होते हैं अर्थात् मंडप सब तरफ सबीे चतुरासन होता है | अर्थात् टेढ़ा नही होता | जिस कुंड की श्रृंगार द्वारा रचना नही होती वह यजमान का नाश करता है |